₹50 लाख से अधिक आय वाले करदाताओं के लिए यह संकेत है कि विभाग की निगरानी अब पूरी तरह डेटा-आधारित और तकनीकी हो चुकी है। छोटी सी गलती भी आगे चलकर बड़ी जांच या दंड का कारण बन सकती है।
जानकारों का कहना है कि नए प्रावधानों में फॉर्म के नंबर बदल सकते हैं, हालांकि प्रोसेस में कोई बड़ा बदलाव आने की संभावना बहुत कम है। कहा जा कहा है कि सरकार पुराने और नए फॉर्म नंबरों को कुछ समय तक पैरेलल रूप से चलाने की अनुमति दे सकती है।
टीसीएस और टीडीएस दोनों का उद्देश्य सरकार को टैक्स कलेक्शन में मदद करना है, लेकिन टीडीएस सीधे आय से और टीसीएस बिक्री के समय एकत्र किया जाता है।
आयकर विभाग ने बुधवार को 10 फरवरी तक के नेट Direct Tax कलेक्शन के आंकड़े जारी किए। यह एक ऐसा टैक्स है जिसे करदाता सीधे सरकार को चुकाता है।
नया आयकर अधिनियम 2025 सरल भाषा, कम धाराओं और डिजिटल फॉर्म्स के साथ आएगा। ये बदलाव मुख्य रूप से अनुपालन आसान बनाने, विवाद कम करने और करदाताओं के प्रति विश्वास बढ़ाने पर केंद्रित हैं।
सरकार का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में पर्सनल इनकम टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन सहित कुल डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 26.97 लाख करोड़ रुपये रह सकता है।
बजट 2026 में सैलरीड क्लास या टैक्सपेयर्स के लिए मोटर एक्सीडेंट मुआवजे, मैनपावर सर्विसेज और Form 15G / 15H की प्रक्रिया सहित कई मामलों में राहत देने का ऐलान किया है। इन घोषणाओं के बाद आपको काफी सुविधा होगी।
करदाताओं के लिए जानकारों की यही सलाह है कि अपनी आय, कटौतियों और भविष्य की योजनाओं के आधार पर दोनों रेजिम की तुलना जरूर करें और उस आधार पर रेजिम तय करें।
टैक्स रिफंड का इंतजार कर रहे लाखों करदाताओं के लिए एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। आयकर विभाग की गहन जांच में खुलासा हुआ है कि एक लाख से ज्यादा लोगों ने टैक्स बचाने और बड़ा रिफंड पाने के लिए फर्जी दावे किए, जिसके चलते एक लाख रुपये से ज्यादा के रिफंड फिलहाल रोक दिए गए हैं।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के मुताबिक, इस अवधि में सिक्यॉरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स से कलेक्शन साल भर पहले की समान अवधि के मुकाबले 44,867 करोड़ रुपये पर लगभग स्थिर रहा।
जानकारों का कहना है कि इसका मुख्य कारण टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा कड़ी जांच है। जानकारों का यह भी कहना है कि रिफंड में देरी सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेजज (सीबीडीटी) द्वारा शुरू की गई NUDGE पहल के दूसरे फेज के कारण हो रही है।
भारत में निवेश करने वाले NRI निवेशकों के लिए यह मामला किसी मिसाल से कम नहीं है। मुंबई की एक महिला ने भारत में म्यूचुअल फंड निवेश से करीब 1.35 करोड़ रुपये की कमाई की और उस पर भारत में एक भी रुपया टैक्स नहीं चुकाया।
नया टैक्स सिस्टम 1 फरवरी, 2026 से लागू होगी। मंत्रालय ने स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर अधिनियम को भी अधिसूचित किया है, जिसके तहत पान मसाला से जुड़े बिजनेस की मैन्यूफैक्चरिंग कैपेसिटी पर सेस लगाया जाएगा।
सरकार का कहना है कि यह पहल न केवल ड्राइवरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगी, बल्कि यात्रियों के लिए भी बेहतर और सुविधाजनक सेवाएं सुनिश्चित करेगी। सहकारिता मंत्रालय की पहल के तहत यह ऐप लाया जा रहा है और इसमें होने वाला पूरा मुनाफा सीधे ड्राइवरों को मिलेगा।
देश के बड़े शहरों में जब भी कैब की जरूरत पड़ती है, लोग सबसे पहले Uber या Ola खोलते हैं। लेकिन अब लोगों को जल्द ही एक नया ऑप्शन भी मिलने वाला है। भारत टैक्सी ऐप 1 जनवरी 2026 से पूरे देश में लॉन्च होने जा रहा है और इससे यात्रियों को बेहतर और भरोसेमंद सेवा मिलने की उम्मीद की जा रही है।
इस नए प्लेटफॉर्म के आने से प्राइवेट कैब सर्विस देने वाली कंपनियों को कड़ी टक्कर मिलने की संभावना है। इसकी सबसे खास बात ये है कि इसमें ड्राइवरों को किसी भी तरह का कोई कमीशन नहीं देना होगा।
अभी तक मोबाइल ऐप आधारित ऑनलाइन कैब सर्विस देने वाली कंपनियां ग्राहकों को एसी या नॉन-एसी कैब चुनने के लिए ऑप्शन नहीं देती थीं।
दूसरी लग्जरी वस्तुओं पर मुआवजा सेस 22 सितंबर को खत्म हो गया था, जब जीएसटी दरों को सरल बनाते हुए केवल दो स्लैब 5 और 18 प्रतिशत तय किए गए थे, जबकि अल्ट्रा-लग्जरी वस्तुओं, एरेरेटेड ड्रिंक्स और अन्य हानिकारक वस्तुओं पर 40 प्रतिशत GST दर तय की गई थी।
मूडीज रेटिंग्स ने कहा कि वृद्धि को घरेलू मांग और निर्यात में विविधीकरण, साथ ही आसान मौद्रिक नीति का समर्थन मिलेगा। सरकार ने हाल ही में 375 वस्तुओं पर जीएसटी दरें कम की हैं।
इनकम टैक्स के तहत कुछ खास निवेश विकल्प हैं जिन्हें आपको दिसंबर खत्म होने से पहले ही अपने पोर्टफोलियो में शामिल कर लेना चाहिए। इससे आपके टैक्स बचत हो सकेगी।
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