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तम्बाकू-पान मसाला पर बढ़ेगा टैक्स; लोकसभा में एक्साइज ड्यूटी और सेस लगाने वाले दो बिल आज पेश करेगी सरकार

 Published : Dec 01, 2025 10:32 am IST,  Updated : Dec 01, 2025 10:32 am IST

दूसरी लग्जरी वस्तुओं पर मुआवजा सेस 22 सितंबर को खत्म हो गया था, जब जीएसटी दरों को सरल बनाते हुए केवल दो स्लैब 5 और 18 प्रतिशत तय किए गए थे, जबकि अल्ट्रा-लग्जरी वस्तुओं, एरेरेटेड ड्रिंक्स और अन्य हानिकारक वस्तुओं पर 40 प्रतिशत GST दर तय की गई थी।

हानिकारक उत्पादों पर सरकारी राजस्व सुरक्षित बनाए रखने की कोशिश है।- India TV Hindi
हानिकारक उत्पादों पर सरकारी राजस्व सुरक्षित बनाए रखने की कोशिश है। Image Source : FREEPIK

केंद्र सरकार सोमवार को लोकसभा में दो महत्वपूर्ण बिल पेश करेगी, जिनका उद्देश्य तंबाकू और पान मसाला जैसे 'सिन गुड्स' पर मौजूदा कर भार को बनाए रखना है, भले ही जीएसटी मुआवजा सेस की अवधि जल्द ही समाप्त हो रही हो। पीटीआई की खबर के मुताबिक, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए जाने वाले ये बिल सुनिश्चित करेंगे कि मुआवजा सेस ख़त्म होने के बाद भी इन हानिकारक उत्पादों पर सरकारी राजस्व सुरक्षित रहे और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए कोष बनाया जा सके।

सेंट्रल एक्साइज (अमेंडमेंट) बिल, 2025

यह बिल मौजूदा जीएसटी मुआवजा सेस को प्रतिस्थापित (रिप्लेस) करेगा। यह सेस वर्तमान में सिगरेट, चबाने वाला तंबाकू, सिगार, हुक्का, जर्दा और खुशबूदार तंबाकू जैसे तंबाकू उत्पादों पर लगाया जाता है।

उद्देश्य: बिल की व्याख्या के अनुसार, इसका मुख्य उद्देश्य "सरकार को केंद्रीय उत्पाद शुल्क की दर बढ़ाने के लिए वित्तीय स्थान प्रदान करना है, ताकि जीएसटी मुआवजा सेस समाप्त होने के बाद भी टैक्स का प्रभाव सुरक्षित रखा जा सके।
नया टैक्स ढांचा: मुआवजा सेस ख़त्म होने के बाद, तंबाकू और संबंधित उत्पादों पर अब GST के साथ-साथ यह नया एक्साइज ड्यूटी भी लगेगा।

हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल, 2025

यह बिल विशेष रूप से पान मसाला जैसे विशिष्ट उत्पादों के उत्पादन पर नया सेस लगाने का प्रस्ताव करता है।
लक्ष्य: बिल के अनुसार, इस सेस का उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए लक्षित उपयोग सुनिश्चित करना है। यह सेस किसी भी अन्य शुल्क या करों के अतिरिक्त होगा।
सरकार को शक्ति: सरकार को यह अधिकार होगा कि वह अन्य ऐसी वस्तुओं को भी अधिसूचित कर सके जिन पर इस प्रकार का सेस लगाया जा सकता है।
कंपनियों को अपने प्रत्येक कारखाने या परिसर के लिए सभी मशीनों या प्रक्रियाओं की स्व-घोषणा करनी होगी, और सेस की गणना हर स्थान के लिए कुल मिलाकर की जाएगी।
चूंकि 28% जीएसटी दर को खत्म कर दिया गया है, तंबाकू और पान मसाला जैसी 'सिन गुड्स' पर अब उच्चतम जीएसटी स्लैब 40 प्रतिशत लागू होगा।

मुआवजा सेस क्यों हो रहा है खत्म?

1 जुलाई 2017 को GST लागू होने पर, राज्यों के राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा सेस व्यवस्था 30 जून 2022 तक पांच साल के लिए लागू की गई थी। बाद में इसकी अवधि को 31 मार्च 2026 तक बढ़ाया गया था, ताकि केंद्र सरकार द्वारा COVID-19 अवधि में राज्यों को GST राजस्व के नुकसान की भरपाई के लिए लिए गए ऋण को चुकाया जा सके। चूंकि यह ऋण दिसंबर में पूरी तरह से चुकता हो जाएगा, इसलिए मुआवजा सेस की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। जीएसटी परिषद ने 3 सितंबर 2025 को निर्णय लिया था कि तंबाकू और पान मसाला पर मुआवजा सेस तब तक जारी रहेगा जब तक केंद्र सरकार द्वारा लिया गया ऋण चुकता नहीं हो जाता।

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