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ज्यादा रिस्क वाले इलाकों से गुजरने पर जहाजों को देना होगा ज्यादा प्रीमियम, युद्ध के बीच बीमा कंपनियों ने बढ़ाए दाम

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : Mar 04, 2026 08:00 am IST,  Updated : Mar 04, 2026 08:00 am IST

बीमा सेक्टर के एक्सपर्ट्स का कहना है कि युद्ध जोखिम और हड़ताल, दंगे और नागरिक अशांति कवर के लिए बीमा कंपनियां आमतौर पर 3 से 7 दिन के नोटिस पर कवरेज रद्द कर सकती हैं।

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ढुलाई लागत में होगी बढ़ोतरी, वैश्विक व्यापार पर पड़ेगा बुरा असर Image Source : AFP

ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ रहे माहौल के बीच एक्सपर्ट्स ने मालवाहक जहाजों के लिए युद्ध जोखिम (वॉर रिस्क) से जुड़ा बीमा प्रीमियम बढ़ने की आशंका जताई है। एक्सपर्ट्स ने मंगलवार को कहा कि ज्यादा रिस्क वाले इलाकों से गुजरने वाले जहाजों को अब ज्यादा प्रीमियम चुकाना होगा। पॉलिसीबाजार के प्रमुख (समुद्री बीमा) बालसुंदरम आर. ने कहा, ''कच्चे तेल और एलएनजी के परिवहन में शामिल शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) के जहाजों की लाल सागर जैसे संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों से गुजरने पर युद्ध जोखिम कवरेज हासिल करने की लागत बढ़ सकती है।''

हाल ही में जारी किया गया है जहाज पर युद्ध कवरेज रद्द करने का नोटिस

बीमा सेक्टर के एक्सपर्ट्स का कहना है कि युद्ध जोखिम और हड़ताल, दंगे और नागरिक अशांति कवर के लिए बीमा कंपनियां आमतौर पर 3 से 7 दिन के नोटिस पर कवरेज रद्द कर सकती हैं। प्रूडेंट इंश्योरेंस ब्रोकर्स के समुद्री विशेषज्ञता प्रमुख गौरव अग्रवाल ने कहा कि हाल ही में जहाज पर युद्ध कवरेज रद्द करने का नोटिस जारी किया गया है और मालवाहक बीमा पर भी ऐसा कदम जल्द उठाया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बीमा कवरेज रद्द होने के बाद नया युद्ध जोखिम कवर उपलब्ध भी होता है तो उसकी कीमत काफी ज्यादा हो सकती है। 

ढुलाई लागत में होगी बढ़ोतरी, वैश्विक व्यापार पर पड़ेगा बुरा असर

इंश्योरेंस ब्रोकर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IBAI) के हरि राधाकृष्णन ने कहा कि कुछ मामलों में प्रीमियम दर 0.25-0.5 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 1.00 प्रतिशत तक पहुंच गई हैं। इससे ढुलाई लागत में बड़ी बढ़ोतरी होगी और वैश्विक व्यापार पर काफी बुरा असर पड़ेगा। बीमा सलाहकारों का मानना है कि संघर्ष लंबा चलने की स्थिति में जहाज खेप की लागत, ढुलाई खर्च और जोखिम प्रीमियम दोनों बढ़ जाएंगे। इसके अलावा, पहले से रवाना हुए कई जहाज अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में खड़े होकर स्थिति सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।

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