भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को ऐसा भूचाल आया कि निवेशकों के होश उड़ गए। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने मिलकर बाजार में जबरदस्त गिरावट ला दी। सुबह कारोबार की शुरुआत होते ही सेंसेक्स और निफ्टी करीब 2% तक टूट गए, जिससे निवेशकों की लगभग ₹8 लाख करोड़ की पूंजी साफ हो गई।
4 मार्च की सुबह बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 1710 अंक गिरकर 78,529 के स्तर पर आ गया, जो पिछले साल अप्रैल के बाद का सबसे निचला स्तर है। वहीं निफ्टी 50 भी करीब 477 अंक फिसलकर 24,389 पर पहुंच गया। लगभग सात महीनों में पहली बार निफ्टी 24,400 के नीचे पहुंच गया था। इस तेज गिरावट से BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर करीब ₹449 लाख करोड़ रह गया।
मिडिल ईस्ट तनाव बना सबसे बड़ा कारण
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता युद्ध तनाव है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। जवाबी हमलों और तेल सप्लाई बाधित होने की आशंका से वैश्विक बाजारों में घबराहट बढ़ गई है। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
हॉर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए दुनिया के 20% से ज्यादा तेल की सप्लाई होती है। इस रूट पर खतरे की आशंका से ब्रेंट क्रूड $82 प्रति बैरल के पार पहुंच गया। भारत अपनी लगभग 85% तेल जरूरत आयात से पूरी करता है, ऐसे में तेल महंगा होना महंगाई और चालू खाते के घाटे को बढ़ा सकता है।
रुपये पर दबाव और FII बिकवाली
तेल की कीमतों में तेजी और भू-राजनीतिक तनाव के बीच रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 92.05 तक फिसल गया। साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिससे बाजार का सेंटिमेंट और कमजोर हुआ है। हालांकि घरेलू निवेशक (DII) खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन वह गिरावट को थामने के लिए पर्याप्त नहीं दिखे।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऊंचे तेल दाम, कमजोर रुपया और संभावित महंगाई कॉरपोरेट मुनाफे पर दबाव डाल सकते हैं।



































