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सबसे पहले LPG, CNG, PNG की जरूरतें होंगी पूरी, सरकार ने प्राथमिकता सूची में किया बदलाव

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : Mar 10, 2026 05:46 pm IST,  Updated : Mar 10, 2026 05:46 pm IST

LPG, CNG, PNG को पिछले 6 महीने की औसत खपत के आधार पर 100 प्रतिशत गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। उर्वरक क्षेत्र को दूसरी प्राथमिकता दी गई है।

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LPG, CNG, PNG के लिए सुनिश्चित की जाएगी 100 प्रतिशत गैस आपूर्ति Image Source : PTI

पश्चिम एशिया में जारी तनाव की वजह से आयातित गैस आपूर्ति बाधित होने के बीच केंद्र सरकार ने घरेलू स्तर पर उत्पादित प्राकृतिक गैस के आवंटन की प्राथमिकता सूची संशोधित कर दी है। नई व्यवस्था में LPG उत्पादन को CNG और PNG (पाइप लाइन के जरिए दी जाने वाली रसोई गैस) के साथ शीर्ष प्राथमिकता दी गई है। सरकार की तरफ से जारी गजट अधिसूचना के मुताबिक, इन क्षेत्रों की जरूरतें पहले पूरी की जाएंगी और उसके बाद ही अन्य क्षेत्रों को गैस उपलब्ध कराई जाएगी। संशोधित व्यवस्था के तहत पीएनजी, सीएनजी और एलपीजी उत्पादन को प्राथमिकता श्रेणी में सबसे ऊपर रखा गया है। 

LPG, CNG, PNG के लिए सुनिश्चित की जाएगी 100 प्रतिशत गैस आपूर्ति

LPG, CNG, PNG को पिछले 6 महीने की औसत खपत के आधार पर 100 प्रतिशत गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। उर्वरक क्षेत्र को दूसरी प्राथमिकता दी गई है और उसकी पिछले 6 महीने की औसत मांग का कम-से-कम 70 प्रतिशत पूरा किया जाएगा। इस सूची में तीसरे स्थान पर चाय उद्योग, विनिर्माण और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को रखा गया है। इन्हें परिचालन उपलब्धता के आधार पर पिछले 6 महीने की औसत गैस खपत का लगभग 80 प्रतिशत उपलब्ध कराया जाएगा। शहरी गैस वितरण (सीजीडी) से जुड़ी कंपनियों द्वारा औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को की जाने वाली आपूर्ति को प्राथमिकता सूची में चौथे स्थान पर रखा गया है। 

भारत में गैस की भारी खपत

बताते चलें कि भारत में घरेलू गैस उत्पादन लगभग 19.1 करोड़ मानक घन मीटर प्रतिदिन की कुल खपत का करीब आधा हिस्सा ही पूरा कर पाता है। ऐसे में पश्चिम एशिया संकट के कारण गैस आपूर्ति बाधित होने से प्राथमिकता तय करने का फैसला किया गया है। सरकार ने कहा कि प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को आपूर्ति बनाए रखने के लिए पेट्रोकेमिकल संयंत्रों, बिजली इकाइयों और ऊंची कीमत पर गैस खरीदने वाले उपभोक्ताओं को मिलने वाली गैस में कटौती की जा सकती है।

 पश्चिम एशिया में भारी तनाव की स्थिति

ईरान पर अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले और फिर ईरान के जवाबी कार्रवाई से पूरे इलाके में तनाव बढ़ा हुआ है। इसके कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले समुद्री यातायात में कमी आई है और ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है। वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 5वां हिस्सा और एलएनजी की लगभग एक-तिहाई आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। सरकार ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए एलएनजी आपूर्ति बाधित होने के कारण आपूर्तिकर्ताओं ने 'फोर्स मेज्योर' प्रावधान लागू कर दिया है। ये प्रावधान किसी असाधारण या अनियंत्रित परिस्थिति के कारण अनुबंध की शर्तें पूरी न कर पाने पर लागू होता है। 

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