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मोती की खेती कर मोटा मुनाफा कमा रहे छोटे किसान, बेकार पड़ी जमीन भी 'उगल रही पैसा'

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : Jun 02, 2026 05:57 pm IST,  Updated : Jun 02, 2026 06:36 pm IST

मुरादाबाद में डॉ. दीपक महदीरत्ता ने मोती की खेती शुरू की थी। उनकी जमीन का स्तर नीचे था, जिसकी वजह से उन्हें पारंपरिक खेती करने में काफी दिक्कतें होती थीं।

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मोती की खेती Image Source : ANI

एक समय था जब भारत में मोती की खेती खासतौर पर महासागरों और तटीय इलाकों में ही हुआ करती थी। हालांकि, अब समय बदल गया है और देश के छोटे शहरों में भी मोती की खेती शुरू हो गई है। इतना ही नहीं, मोती की खेती अब इन छोटे शहरों में आजीविका के एक नए और प्रमुख स्रोत के रूप में उभर रही है। किसान अब एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के माध्यम से जलभराव वाली खाली जमीनों को मोटा मुनाफा देने वाले एक्वाकल्चर (जलीय खेती) के उद्यमों में बदल रहे हैं।

मुरादाबाद में तेजी से बढ़ रही है मोती की खेती

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में, मोती की खेती अब कौशल विकास, जागरूकता और खेती की आधुनिक तकनीकों को मिलाकर किसानों और युवा उद्यमियों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा कर रही है। मोती की खेती के लिए इस्तेमाल होने वाले तालाब काफी साधारण लगते हैं। लेकिन तैरती हुई बोतलों और पानी के नीचे बने जाल के ढांचों के नीचे सावधानी से तैयार किया एक सिस्टम छिपा है, जहां कई महीनों तक सीपियों (oysters) की खेती करके मोती पैदा किए जाते हैं।

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Image Source : ANIमोती की खेती

डॉ. दीपक महदीरत्ता ने सबसे पहले शुरू की थी मोती की खेती

एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुरादाबाद में डॉ. दीपक महदीरत्ता ने मोती की खेती शुरू की थी। उनकी जमीन का स्तर नीचे था, जिसकी वजह से उन्हें पारंपरिक खेती करने में काफी दिक्कतें होती थीं। यही वजह थी कि उन्होंने यहां मोती की खेती शुरू कर दी। उन्होंने कहा, ''हम नियमित फसलें नहीं उगा पा रहे थे, क्योंकि हमारे खेतों में अक्सर पानी भर जाता था। यहां तक कि आसपास के ऊंचे खेतों से भी पानी बहकर हमारी जमीन पर आकर इकट्ठा हो जाता था, जिससे खेती करना लगभग नामुमकिन हो गया था।"

पारंपरिक खेती की तुलना में जबरदस्त मुनाफा

उन्होंने कहा, "ऐसे में हमने मोती की खेती शुरू करने का फैसला किया। हमें पता चला कि देश में इसकी बहुत ज्यादा मांग है और बाजार में इसकी काफी संभावनाएं हैं।" मोती की खेती में एक खास प्रक्रिया के जरिए सीपियों के अंदर एक छोटा सा 'न्यूक्लियस' (केन्द्रक) डाला जाता है। इसके बाद, सीपियों को सावधानी से तालाब के नियंत्रित वातावरण में रखा जाता है, जहां समय के साथ-साथ उनके खोल के अंदर प्राकृतिक रूप से मोती बनने लगते हैं। इसमें सब्र, लगातार निगरानी और पानी के सही प्रबंधन की जरूरत होती है। हालांकि, इसमें पारंपरिक खेती की तुलना में भारी मुनाफा कमाया जा सकता है।

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Image Source : ANIमोती

स्थानीय किसानों को भी ट्रेनिंग दे रहे हैं महदीरत्ता

महदीरत्ता अब युवाओं और स्थानीय किसानों को भी मोती की खेती की ट्रेनिंग दे रहे हैं, ताकि वे अपने लिए आजीविका के नए मौके पैदा कर सकें। छात्र अनमोल चहल ने कहा कि मोती की खेती में कमाई की काफी संभावनाएं हैं, खासकर छोटे किसानों के लिए। उन्होंने कहा, "जिस व्यक्ति के पास खेती के लिए कम जमीन है, वो खेती के कई पारंपरिक तरीकों के मुकाबले मोती की खेती से कहीं ज्यादा कमा सकता है, बशर्ते इसे सही तरीके से किया जाए। इसके लिए बहुत ज्यादा जगह की जरूरत नहीं होती, लेकिन इससे काफी अच्छी आमदनी हो सकती है।"

कई किसानों से शुरू की मोती की खेती

इस मॉडल से प्रेरित होकर, स्थानीय किसान सुनीता और सुभाष चंद्र ने भी अपने तालाबों में मोती की खेती शुरू कर दी है। सुभाष ने बताया, ''मेरे नाम पर 25,000 और मेरी पत्नी के नाम पर 25,000 सीप (oysters) रजिस्टर्ड हैं। जैसे-जैसे मोती की खेती के बारे में जागरूकता फैल रही है, मुरादाबाद मॉडल को एक ऐसे उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है जिससे पता चलता है कि कैसे नए तरीके और खेती के दूसरे विकल्प गाँवों में रहने वाले लोगों और युवा उद्यमियों के लिए लगातार कमाई के मौके पैदा कर सकते हैं।

मोती की खेती शुरू करने में कितनी आएगी लागत, कितना होगा मुनाफा

आमतौर पर 2 बीघा जमीन पर मोती की खेती शुरू करने में कुल अनुमानित लागत 4 से 5 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। अगर आपके पास पहले से ही कोई तालाब है तो ये लागत 1 लाख रुपये तक कम हो सकती है। इसके अलावा, आपको ये भी जानना चाहिए कि अगर आप आगे भी मोती की खेती को जारी रखना चाहते हैं तो अगली बार आपकी लागत में काफी कम लागत आएगी, क्योंकि अगली बार आपको तालाब की खुदाई और उपकरण दोबारा खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 2 बीघा जमीन पर मोती की खेती शुरू की जाए तो आपको 15 से 20 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा हो सकता है। बताते चलें कि मोती की फसल पूरी तरह से तैयार होने में 12 से 18 महीने का लंबा समय लगता है।

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