फूड और किराना डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी को बीते मंगलवार को 158 करोड़ रुपये से ज्यादा की अतिरिक्त टैक्स मांग के साथ एक मूल्यांकन आदेश हासिल हुआ है। यह आदेश आयकर उपायुक्त, सेंट्रल सर्कल 1 (1), बैंगलोर की तरफ से जारी किया गया है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, यह टैक्स नोटिस अप्रैल 2021 से मार्च 2022 के बीच की अवधि के लिए मिला है। यह आयकर अधिनियम 1961 की धारा 37 के तहत अस्वीकृत व्यापारियों को भुगतान किए गए कैंसिलेशन चार्ज और टैक्स के लिए पेश नहीं किए जा रहे आयकर रिफंड पर ब्याज आय सहित कथित उल्लंघनों से संबंधित है।
कंपनी उठा रही जरूरी कदम
खबर के मुताबिक, स्विगी ने एक नियामक फाइलिंग में कहा कि कंपनी को अप्रैल 2021 से मार्च 2022 की अवधि के लिए एक मूल्यांकन आदेश प्राप्त हुआ है, जिसमें 158,25,80,987 रुपये की अतिरिक्त राशि जोड़ी गई है। स्विगी का मानना है कि उसके पास आदेश के खिलाफ मजबूत तर्क हैं और वह समीक्षा/अपील के जरिये अपने हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठा रही है। कंपनी ने कहा कि इस आदेश से उसके वित्तीय और परिचालन पर कोई बड़ा प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
स्विगी का शेयर प्राइस
स्विगी के शेयर बीते मंगलवार 0.50 प्रतिशत बढ़कर ₹331.55 पर बंद हुए, जबकि पिछले बाजार बंद होने पर यह ₹329.90 पर बंद हुए थे। फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के शेयर 13 नवंबर, 2024 को भारतीय शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुए थे। 2025 में साल-दर-साल आधार पर शेयरों में 38.85 प्रतिशत की गिरावट आई है।
स्विगी ने फास्टिंग मोड फीचर की है शुरू
स्विगी ने कुछ दिनों पहले ही फास्टिंग मोड फीचर लॉन्च किया है, जो यूजर्स को उपवास के दौरान खाद्य सूचनाओं को रोकने की सुविधा प्रदान करता है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि यूजर्स स्विगी ऐप से किसी भी समय उपवास मोड को चालू या बंद कर सकते हैं। यह मोड पूरे साल विभिन्न उपवास अवसरों के लिए उपलब्ध रहेगा, जिससे उपयोगकर्ताओं को अपने खाद्य सूचनाओं को प्रबंधित करने में अधिक लचीलापन मिलेगा।



































