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Tata Steel ने कर दिया ये अजूबा, बना दी देश की पहली ऐसी पाइप, इस मामले में कहलाई देश की पहली कंपनी

 Published : Jan 29, 2025 02:48 pm IST,  Updated : Jan 29, 2025 02:48 pm IST

टाटा स्टील का मानना है कि हाइड्रोजन परिवहन के अनुकूल स्टील की मांग 2026-27 से शुरू होने की उम्मीद है, जिसमें अगले 5 से 7 वर्षों में 350KT की कुल स्टील की जरूरत होगी।

गैसीय हाइड्रोजन के परिवहन के लिए हॉट-रोल्ड स्टील का इस्तेमाल होता है।- India TV Hindi
गैसीय हाइड्रोजन के परिवहन के लिए हॉट-रोल्ड स्टील का इस्तेमाल होता है। Image Source : TATA STEEL

देश और दुनिया की दिग्गज स्टील मेकर टाटा स्टील ने बुधवार को बताया कि वह हाइड्रोजन परिवहन के लिए पाइप विकसित करने वाली भारत की पहली स्टील कंपनी बन गई है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि टाटा स्टील के खोपोली प्लांट में कलिंगनगर प्लांट में निर्मित स्टील का उपयोग करके संसाधित किए गए पाइपों ने हाइड्रोजन परिवहन के लिए आवश्यक सभी महत्वपूर्ण गुणों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, 2024 में, टाटा स्टील गैसीय हाइड्रोजन के परिवहन के लिए हॉट-रोल्ड स्टील का उत्पादन करने वाली पहली भारतीय स्टील कंपनी बन गई।

इटली में किए गए परीक्षण

खबर के मुताबिक, हाइड्रोजन योग्यता परीक्षण RINA-CSM S.p.A, इटली में किए गए, जो हाइड्रोजन से संबंधित परीक्षण और लक्षण वर्णन के लिए एक प्रमुख अनुमोदन एजेंसी है। बयान में कहा गया कि नए हाइड्रोजन-अनुपालक API X65 ग्रेड पाइप का उपयोग उच्च दबाव (100 बार) के तहत 100 प्रतिशत शुद्ध गैसीय हाइड्रोजन के परिवहन के लिए किया जा सकता है। टाटा स्टील के उपाध्यक्ष (मार्केटिंग एवं बिक्री (फ्लैट उत्पाद) प्रभात कुमार ने कहा कि टाटा स्टील हमेशा से ही महत्वपूर्ण स्टील ग्रेड के निर्माण के लिए टेक्नोलॉजी डेवलप करने में सबसे आगे रही है। नए ERW पाइपों का सफल परीक्षण हमारी क्षमताओं को प्रदर्शित करता है। हमें भारत के राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन में योगदान देने पर गर्व है, जो अपने आप में देश के चल रहे स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण का एक प्रमुख घटक है।

पहली भारतीय स्टील कंपनी होने पर गर्व

कुमार ने कहा कि टाटा स्टील को इस चुनौती को सफलतापूर्वक स्वीकार करने वाली और इन स्पेशल ग्रेड स्टील पाइपों की उभरती घरेलू और वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए उत्पाद वितरित करने वाली पहली भारतीय स्टील कंपनी होने पर गर्व है। कंपनी ने कहा कि इसकी अनुसंधान और विकास टीम ने हाइड्रोजन परिवहन और भंडारण के लिए बड़े पैमाने पर अभिनव और टिकाऊ समाधान विकसित किए हैं। राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन भारत को 2030 तक प्रति वर्ष कम से कम 5 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करने की क्षमता बनाने में सक्षम बनाएगा, जिसमें निर्यात की अतिरिक्त मांग के साथ प्रति वर्ष 10 एमएमटी तक पहुंचने की क्षमता है। इसके लिए उत्पादन और परिवहन में पर्याप्त निवेश की जरूरत होगी।

हाइड्रोजन परिवहन के अनुकूल स्टील की मांग 2026-27 से शुरू होने की उम्मीद है, जिसमें अगले 5 से 7 वर्षों में 350KT की कुल स्टील की जरूरत होगी। जबकि हाइड्रोजन परिवहन के विभिन्न तंत्र उपलब्ध हैं, स्टील पाइपलाइनों को बड़े पैमाने पर परिवहन के लिए आर्थिक रूप से अधिक व्यवहार्य माना जाता है।

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