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ट्रेन के डिब्बे पर लिखा 5 अंकों का नंबर क्या बताता है? 95% लोग नहीं जानते इसका असली मतलब!

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Jan 02, 2026 05:01 pm IST,  Updated : Jan 02, 2026 05:01 pm IST

भारतीय रेलवे को यूं ही देश की रीढ़ नहीं कहा जाता। रोजाना करोड़ों यात्री ट्रेनों से सफर करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि हर ट्रेन के डिब्बे के ऊपर एक 5 अंकों का नंबर लिखा होता है? अधिकतर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं।

ट्रेन के कोच में लिखे...- India TV Hindi
ट्रेन के कोच में लिखे नंबर में क्या जानकारी छुपी होती है। Image Source : ANI

अगर आप अक्सर ट्रेन से सफर करते हैं, तो आपने डिब्बों के बाहर लिखा एक 5 अंकों का नंबर जरूर देखा होगा। ज्यादातर यात्री इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह नंबर सिर्फ पहचान के लिए नहीं, बल्कि रेलवे की एक महत्वपूर्ण जानकारी छुपी होती है। इस 5 डिजिट कोड में कोच की उम्र से लेकर उसकी कैटेगरी तक की पूरी जानकारी छुपी होती है, जिसे 95 प्रतिशत लोग आज भी नहीं जानते।

भारतीय रेलवे को देश की रीढ़ कहा जाता है और हर दिन करोड़ों यात्री इसका इस्तेमाल करते हैं। रेलवे ने कोचों की पहचान और रखरखाव के लिए यह 5 अंकों का कोड सिस्टम अपनाया है, ताकि किसी भी डिब्बे की जानकारी तुरंत हासिल की जा सके। यह कोड हर कोच के बाहर साफ-साफ लिखा होता है।

ट्रेन के कोच में लिखे नंबर की जानकारी
Image Source : ANIट्रेन के कोच में लिखे नंबर की जानकारी

5 अंकों के नंबर का क्या मतलब?

इस 5 अंकों के नंबर के पहले दो अंक कोच के निर्माण वर्ष को दर्शाते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर किसी कोच पर नंबर 00296 लिखा है, तो इसके शुरुआती दो अंक “00” बताते हैं कि यह डिब्बा साल 2000 में बनाया गया था। इससे रेलवे को कोच की उम्र और उसकी मेंटेनेंस जरूरत समझने में आसानी होती है।

वहीं आखिरी तीन अंक सबसे ज्यादा जानकारी देने वाले होते हैं। ये अंक बताते हैं कि आप किस तरह के कोच (एसी, स्लीपर या जनरल) में सफर कर रहे हैं। उदाहरण के लिए:

  • 001 से 025: एसी फर्स्ट क्लास
  • 051 से 100: एसी 2 टियर
  • 101 से 150: एसी 3 टियर
  • 201 से 400: स्लीपर क्लास
  • 401 से 600: जनरल सेकेंड क्लास
  • 601 से 700: सेकेंड क्लास सीटिंग

अगर कोच नंबर के आखिरी तीन अंक 296 हैं, तो इसका मतलब है कि वह स्लीपर क्लास कोच है। इसी तरह पैंट्री कार, जनरेटर या मेल वैन के लिए भी अलग नंबर रेंज तय की गई है।

इस तरह, ट्रेन के डिब्बे पर लिखा यह 5 अंकों का नंबर सिर्फ एक पहचान नहीं, बल्कि रेलवे की स्मार्ट ट्रैकिंग और सेफ्टी व्यवस्था का अहम हिस्सा है। अगली बार जब आप ट्रेन में सफर करें तो इस नंबर पर जरूर नजर डालिएगा।

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