ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने कहा कि अमेरिका और वेनेजुएला विवाद का भारत के वेनेजुएला के साथ व्यापार पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। अमेरिकी सेना ने 4 जनवरी को वेनेजुएला में बड़ी सैन्य कार्रवाई की, जिसमें राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर अमेरिका ले जाया गया। GTRI के फाउंडर अजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारत के लिए इसका आर्थिक या ऊर्जा क्षेत्र पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं होगा, क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत-वेनेजुएला व्यापार पहले ही काफी कम हो चुका है।
वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात 81.3 प्रतिशत घटा
अजय श्रीवास्तव ने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात 81.3 प्रतिशत घटकर 2.55 अरब डॉलर रह गया, जबकि कुल व्यापार भी मामूली स्तर पर ही रहा। भारत का वेनेजुएला को दवा सहित अन्य उत्पादों का निर्यात 9.53 करोड़ डॉलर का रहा। उन्होंने कहा कि भारत और वेनेजुएला के बीच व्यापार घटता जा रहा है। इसके पीछे अमेरिकी प्रतिबंध और व्यापारिक गतिविधियों में कमी मुख्य कारण हैं। उन्होंने ये भी कहा कि कम व्यापार, सख्त प्रतिबंध और बड़ी दूरी को देखते हुए वेनेजुएला की हाल की घटनाएं भारत की अर्थव्यवस्था या ऊर्जा सुरक्षा पर कोई बड़ा असर नहीं डालेंगी।
एक बार फिर चर्चा में आई कच्चे तेल की कीमतें
वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई और फिर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वेनेजुएला के तेल क्षेत्र पर नियंत्रण करने वाले बयान के बाद कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई हैं। इस घटनाक्रम ने कच्चे तेल के वैश्विक बाजारों में पहले ही माहौल बदल दिया है और सोमवार को बाजार खुलने पर ये तय करेगा कि भारतीय इक्विटी, रुपया और एनर्जी स्टॉक्स कैसे ट्रेड करेंगे। एनालिस्ट्स ने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई ने तेल की कीमतों में नया जियोपॉलिटिकल रिस्क डाल दिया है।
वेनेजुएला के पास है दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार
वेनेजुएला के पास 303 बिलियन बैरल का दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, जो सऊदी अरब से भी ज्यादा है। लेकिन सालों के खराब प्रबंधन, कम निवेश और प्रतिबंधों के कारण वेनेजुएला का तेल उत्पादन बुरी तरह गिर गया। विश्लेषकों ने बताया कि खराब इंफ्रास्ट्रक्चर और अनसुलझे कानूनी मुद्दों को देखते हुए वेनेजुएला के उत्पादन में तुरंत बढ़ोतरी की संभावना नहीं है, लेकिन अमेरिका के नेतृत्व में इस सेक्टर में सुधार से आखिरकार ग्लोबल मार्केट में सप्लाई बढ़ सकती है, जिससे कीमतों में स्थिरता आएगी।



































