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दूरसंचार क्षेत्र के लिए घटना प्रधान रहेगा नया साल, डाटा की कीमतों में आएगी और गिरावट

 Written By: Dharmender Chaudhary
 Published : Dec 25, 2016 04:04 pm IST,  Updated : Dec 25, 2016 04:04 pm IST

डाटा शुल्क दरों में कमी, नि:शुल्क वॉयस कॉल, रिलायंस जियो का आना और कॉल ड्राप जैसे मुद्दे नए साल में भी भारतीय दूरसंचार क्षेत्र की दशा निर्धारित करेंगे।

दूरसंचार क्षेत्र के लिए घटना प्रधान रहेगा नया साल, डाटा की कीमतों में आएगी और गिरावट- India TV Hindi
दूरसंचार क्षेत्र के लिए घटना प्रधान रहेगा नया साल, डाटा की कीमतों में आएगी और गिरावट

नई दिल्ली। दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ते दूरसंचार बाजारों में से एक भारत के लिए नया साल भी घटना प्रधान रहने की उम्मीद है। डाटा शुल्क दरों में कमी, नि:शुल्क वॉयस कॉल, रिलायंस जियो का आना और कॉल ड्राप जैसे मुद्दे नए साल में भी भारतीय दूरसंचार क्षेत्र की दशा व दिशा निर्धारित करेंगे, ऐसा अनुमान है। इतना तो यह है कि साल 2016 दूरसंचार ग्राहकों के लिए कई लिहाज से विशिष्ट रहा। डेटा शुल्क में भारी गिरावट आई और वॉयस कॉल भी सस्ती हुई। 4जी प्रौद्योगिकी के बढ़ते इस्तेमाल से सेवाओं की गुणवत्ता में भी खासा सुधार देखने को मिला।

उदयोग संगठन सीओएआई के महानिदेशक राजन एस मैथ्यूज का कहना है, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं ने विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा खड़ा करने के लिए अब तक 9,27,000 करोड़ रुपए का निवेश किया है। मौजूदा दूरसंचार कंपनियां साल भर यह बताती रहीं कि उनकी आय किस तरह प्रभावित हुई है।

इसके कई कारण रहे जिनमें फेसबुक की फ्रीबेसिक्स व एयरटेल जीरो जैसी भिन्न शुल्क दर योजनाओं को रोकने का ट्राई का फैसला व रिलायंस जियो की नि:शुल्क सेवाएं जैसे अनेक कारण हैं।

डेलायट हेसकिंस एंड सेल्स एलएलपी के पार्टनर हेमंत जोशी के अनुसार भिन्न शुल्क दर योजनाओं पर प्रतिबंध ने डेटा सेवाओं को वहनीय स्तर या नीचे लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस साल की शुरुआत में काल ड्राप पर कंपनियों के खिलाफ जुर्माना लगाने के प्रावधान को समाप्त कर ग्राहकों को झटका दिया और दूरसंचार नियामक ने उल्लंघन कर रही कंपनियों को दंडित करने के लिए और अधिकारों की मांग उठाई।

मैथ्यूज का कहना है कि कॉल ड्रॉप की समस्या से निपटने के लिए दूरसंचार कंपनियों ने बीते 12 महीने में लगभग 3.51 लाख बीटीएस स्थापित किए हैं।

  • बीता साल भी इस क्षेत्र के लिए बहुत घटना प्रधान रहा।
  • हैंडसेट कीमतों में गिरावट, नए सस्ते माडलों के बाजार में आने और नेटवर्क गुणवत्ता सुधार के लिए कंपनियों द्वारा किए जा रहे निवेश के बीच कुछ न कुछ होता रहा।
  • इसी साल भारत अमेरिका को पछाड़कर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार बन गया।
  • भारत में हैंडसेट की संख्या 27.5 करोड़ आंकी गई।
  • ऐसा माना जा रहा है कि 2020 तक 4जी कनेक्शन की संख्या बढ़कर 28 करोड़ हो जाएगी।
  • मोबाइल उद्योग के संगठन जीएसएमए का अनुमान है कि 2020 तक देश में 33 करोड़ विशिष्ट ग्राहक होंगे।
  • दूरसंचार कंपनियों द्वारा आने वाले दिनों में भारी भरकम निवेश किए जाने की उम्मीद है।
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