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शेयर बाजार में ब्लडबाथ: 6 दिनों में निवेशकों के डूबे 17 लाख करोड़ रुपये, आखिर क्या है इस गिरावट की वजह?

Edited By: Shivendra Singh Published : Jan 12, 2026 10:35 am IST, Updated : Jan 12, 2026 10:35 am IST

भारतीय शेयर बाजार में इन दिनों निवेशकों के लिए हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। बीते छह कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स अपने 2 जनवरी के उच्च स्तर 85,762 से करीब 2700 अंक लुढ़क चुका है। वहीं निफ्टी भी इस दौरान करीब 3 फीसदी की गिरावट दर्ज कर चुका है।

निवेशकों के डूबे 17 लाख...- India TV Paisa
Photo:ANI/CANVA निवेशकों के डूबे 17 लाख करोड़ रुपये

नए साल की शुरुआत में जिस शेयर बाजार से तेजी की उम्मीद की जा रही थी, वही बाजार अब निवेशकों के लिए सिरदर्द बन गया है। बीते छह कारोबारी दिनों में दलाल स्ट्रीट पर ऐसी जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली है कि निवेशकों की संपत्ति करीब 17 लाख करोड़ रुपये घट चुकी है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही प्रमुख इंडेक्स लगातार लाल निशान में फिसलते नजर आ रहे हैं, जिससे बाजार में डर और अनिश्चितता का माहौल बन गया है।

सोमवार को भी बाजार की कमजोर शुरुआत हुई। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 500 अंक से ज्यादा टूटकर 83,043 के निचले स्तर तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी 140 अंकों से अधिक गिरकर 25,550 के नीचे फिसल गया। 2 जनवरी को सेंसेक्स जहां 85,762 के स्तर पर बंद हुआ था, वहीं अब तक इसमें 2700 से ज्यादा अंकों की गिरावट आ चुकी है। इसी अवधि में निफ्टी करीब 3 फीसदी टूट चुका है। इसके चलते बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर 464.39 लाख करोड़ रुपये रह गया है।

गिरावट के पीछे क्या हैं बड़ी वजहें?

1. अमेरिका-भारत ट्रेड डील पर बढ़ी अनिश्चितता

शेयर बाजार की सबसे बड़ी चिंता अमेरिका से जुड़ी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी और भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर स्थिति साफ नहीं हो पा रही है। यूएस सुप्रीम कोर्ट से टैरिफ पर जिस फैसले की उम्मीद थी, वह नहीं आ सका, जिससे निवेशकों की बेचैनी और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस असमंजस ने बाजार की दिशा कमजोर कर दी है।

2. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

एफआईआई (Foreign Institutional Investors) लगातार भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। बीते शुक्रवार को ही विदेशी निवेशकों ने करीब 3769 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। यह बिकवाली छह दिनों से जारी है, जिसने बाजार पर भारी दबाव बना दिया है और लिक्विडिटी को कमजोर किया है।

3. कमजोर ग्लोबल संकेत और भू-राजनीतिक तनाव

वैश्विक बाजारों से भी सकारात्मक संकेत नहीं मिल रहे हैं। अमेरिका में फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को लेकर उठे सवाल, यूरोप और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव ने रिस्क लेने की भूख को कम कर दिया है। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा है।

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