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Bulls Eye: नियमित निवेश के लिए RD भी है एक बेहतर विकल्‍प, छोटी बचत से पा सकते हैं बड़े लक्ष्‍य

 Written By: Abhishek Shrivastava
 Published : Mar 12, 2016 02:00 pm IST,  Updated : Mar 12, 2016 02:15 pm IST

RD एक तरह का सिस्‍टेमेटिक इंवेस्‍टमेंट प्‍लान होता है, जिसमें हर महीने छोटी छोटी राशि निवेश करनी होगी है, इस पर ब्‍याज भी फिक्‍स डिपॉजिट जितना मिलता है।

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Bulls Eye: नियमित निवेश के लिए RD भी है एक बेहतर विकल्‍प, छोटी बचत से पा सकते हैं बड़े लक्ष्‍य

नई दिल्‍ली। हम सभी अपने परिवार का भविष्‍य संपन्‍न और खुशहाल बनाने के लिए लंबे समय के निवेश विकल्‍पों की तलाश करते हैं। आमतौर पर लॉन्‍ग टर्म इंवेस्‍टमेंट के लिए हमारे दिमाग में इंश्‍योरेंस, म्‍यूचुअल फंड, गोल्‍ड, शेयर और फिक्‍स‍ डिपॉजिट जैसे विकल्‍प सबसे पहले आते हैं। लेकिन इस बीच हम एक सबसे आसान और ताकतवर विकल्‍प भूल जाते हैं, वह है रेकरिंग डिपॉजिट(RD) । RD एक तरह का सिस्‍टेमेटिक इंवेस्‍टमेंट प्‍लान(एसआईपी) होता है, जिसमें आपको हर महीने छोटी छोटी राशि निवेश करनी होगी है, इस पर ब्‍याज भी फिक्‍स डिपॉजिट जितना मिलता है। इंडिया टीवी पैसा की टीम अपने रीडर्स के लिए आज रेकरिंग डिपॉजिट में निवेश के फायदों के बारे में बताने जा रही है। जिससे आप लंबे समय में फायदा उठा सकते हैं।

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जानिए कहां निवेश कर बचा सकते हैं टैक्‍स

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कैसे खुलता है रेकरिंग अकाउंट

RD बचत का सबसे आसान और सुविधाजनक तरीका है। लगभग सभी बैंक रिकरिंग डिपाजिट (आरडी) अकाउंट खोलने की सुविधा देते हैं। आप न्यूनतम 6 माह और अधिकतम 120 माह के लिए यह अकाउंट खोल सकते हैं। अधिकतर बैंक आजकल ऑनलाइन बैंकिंग के तहत भी आरडी अकाउंट खोलने की सुविधा देते हैं। इसके अलावा आप पोस्‍ट ऑफिस में भी रेकरिंग डिपॉजिट अकाउंट खोल सकते हैं। इसमें आपको हर महीने एक छोटी राशि नियमित रूप से निवेश करनी होगी। इस पर ब्‍याज बैंक और पोस्‍टऑफिस द्वारा पहले ही तय कर दिय जाता है।

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सिस्‍टेमेटिक इंवेस्‍टमेंट प्‍लान का आसान तरीका है आरडी

आरडी अकाउंट अकाउंट के जरिए निवेश करने का तरीका बिल्कुल म्यूचुअल फंड योजना में सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी सिप की तरह है। सिप में भी आप थोड़ी-थोड़ी मासिक बचत से बड़ी रकम बना सकते हैं और रिकरिंग डिपाजिट में भी आप इसी तरह बचत करके बड़ी रकम बना सकते हैं। म्यूचुअल फंड में जोखिम हो सकता है लेकिन रिकरिंग डिपाजिट अकाउंट में कोई जोखिम नहीं है क्योंकि आपका पैसा सरकारी बैंक में जमा हो रहा है जो पूरी तरह सुरक्षित समझा जाता है।

आरडी भी बना सकती है आपको करोड़पति

रेकरिंग डिपॉजिट का सबसे बड़ा हथियार इसका कंपाउंड इंटरेस्‍ट होता है, यह ब्‍याज आपको बढ़ती हुई जमा राशि पर चक्रवृद्धि दर से लगता है। निवेश जानकारों के अनुसार यदि आप हर महीने 5,500 रुपए से लेकर 6000 रुपए तीस वर्षों तक निवेश करते हैं और आपको बैंक से 9 फीसदी का ब्‍याज मिलता है तो आप एक करोड़ से ज्‍यादा राशि जमा कर सकते हैं। यहां पर सवाल यह है कि अगर बैंक सिर्फ 120 माह के लिए ही यह अकाउंट खोलने की सुविधा देते हैं तो 30 साल यानी 360 माह तक कैसे रिकरिंड डिपाजिट में पैसे जमा कर सकते हैं। इसके लिए आप तीन अलग-अलग अकाउंट 10-10 साल के लिए खोल सकते हैं।

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ऐसे समझें कंपाउंडिंग का गणित

कितने रुपए प्रति माह जमा करके कितने वर्षो में अपने लक्ष्‍य को प्राप्‍त किया जा सकता है इसकी गणना आप स्वयं कर सकते हैं। इसको इस उदाहरण से समझा जा सकता है कि अगर आप अपने आरडी अकाउंट में हर वर्ष 100 रुपए जमा करते हैं और साल में इस पर 10 फीसदी की दर से ब्याज मिलता है तो साल में यह रुपए 110 रुपए हो जाएंगे। अब अगले साल आपको इस 110 रुपए पर 10 फीसदी ब्याज मिलेगा तो आपके पास 121 रुपए हो जाएंगे। इसी को कंपाउंड इंटरेस्ट यानी चक्रवृद्धि ब्याज कहते हैं यानी ब्याज पर भी ब्याज मिलता है जिसकी वजह से आपकी रकम तेजी से बढ़ती है।

जरूरत के वक्‍त कर सकते हैं विड्रॉल

रिकरिंग डिपाजिट अकाउंट खोलने वाले व्यक्ति को अगर अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाती है तो उसे उसके द्वारा की गई कुल जमा की 90 फीसदी तक रकम कर्ज के रूप में मिल सकती है। इस पर ब्याज दर भी बाजार दर से कम होती है। इसके अलावा सीनियर सिटीजन द्वारा आरडी अकाउंट खोले जाने पर उन्हें आधा फीसदी अधिक ब्याज मिलता है। लेकिन आरडी अकाउंट खोलने वाला व्यक्ति अगर हर माह जमा की जाने वाली रकम को समय पर नहीं जमा करता है तो उस पर प्रति सैकड़ा एक से डेढ़ रपए तक की पेनाल्टी लग सकती है। यह जमा योजना आयकर के दायरे में आती है।

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