आज चांदी की कीमतों में लगातार 9वें दिन बंपर तेजी जारी रही और इसने स्थानीय सर्राफा बाजार में एक नया रिकॉर्ड बना दिया।
मंगलवार को चांदी का भाव 2,71,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था। पिछले 4 दिनों में ही चांदी 17.45 प्रतिशत यानी 42,500 रुपये महंगी हो चुकी है।
31 दिसंबर, 2025 को दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत 2000 रुपये की गिरावट के साथ 2,39,000 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी।
अजय केडिया ने बताया कि चांदी की कीमत 2,54,174 रुपये पर पहुंच गई है और इस साल इसमें 175% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है।
19 दिसंबर के बाद से चांदी की कीमत 31,348 रुपये यानी 15.04 प्रतिशत बढ़ी। इस दौरान तेज उतार-चढ़ाव के बीच कारोबारियों की आक्रामक खरीदारी देखने को मिली।
अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, शुक्रवार को दिल्ली में चांदी की कीमत 9350 रुपये की छलांग के साथ 2,36,350 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
चांदी की कीमतों में यह ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्शाती है कि यह धातु केवल एक निवेश उपकरण ही नहीं, बल्कि औद्योगिक रूप से भी अत्यधिक महत्वपूर्ण बन गई है। निवेशकों के लिए यह एक आकर्षक विकल्प बन चुका है, और भविष्य में चांदी की कीमतों में और बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में अतिरिक्त कटौती की बढ़ती स्वीकार्यता के बीच मजबूत वैश्विक रुझानों के चलते सोमवार को घरेलू वायदा कारोबार में सोने की कीमतें पहली बार 1.20 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर गईं।
चांदी को निवेश और औद्योगिक मांग, भू-राजनीतिक तनाव और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में मौद्रिक नीति में ढील की उम्मीदों के मिश्रण से लाभ हुआ है।
जानकारों का कहना है कि सोने की कीमतों में नरमी यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के बीच हुई शांति वार्ता से आई है।
सोने की कीमत में हाल में आई तेजी के बाद गिरावट का रुझान देखने को मिल रहा है। हालांकि, दुनिया में सोने की सुरक्षित निवेश की मांग को बल मिला है।
जानकारों का मानना है कि शुक्रवार को ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली बैठक से रूस-यूक्रेन युद्ध पर संभावित शांति योजना का ऐलान हो सकता है, जिससे सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में सोने की मांग पर असर पड़ सकता है।
सोने की कीमतों को मंगलवार को सेफ हैवन एसेट के रूप में बढ़ती मांग का समर्थन मिला। साथ ही, यह उम्मीद भी बाजार में है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अगले महीने होने वाली बैठक में ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला फिर शुरू कर सकता है।
भारतीय रुपये की कमजोरी, अमेरिका के कमजोर आर्थिक संकेतक और टैरिफ को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंता ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों को सपोर्ट कर दिया, जिससे कीमतों में तेजी आई।
चांदी की कीमत में कल गिरावट के बाद आज बड़ी तेजी दर्ज की गई। यह तेजी औद्योगिक मांग के कारण आई।
हफ्ते के शुरुआती दो दिनों में गिरावट दर्ज किए जाने से पहले, पिछले हफ्ते शुक्रवार को चांदी के भाव में 300 रुपये की तेजी देखी गई थी। इस तेजी के साथ शुक्रवार को चांदी की कीमत 93,300 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई। पिछले हफ्ते गुरुवार को चांदी के कीमत में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं हुआ था।
सिक्का निर्माताओं और इंडस्ट्रियल यूनिट्स की कमजोर खरीदारी की वजह से बुधवार को चांदी के भाव में गिरावट दर्ज की गई थी। यानी पिछले 3 दिनों में चांदी के भाव में 3 तरह के अलग-अलग बदलाव देखने को मिले हैं।
व्यापारियों ने कहा कि कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण विदेशों में कमजोर रुख के बीच स्थानीय आभूषण विक्रेताओं की सुस्त मांग है। औद्योगिक इकाइयों और सिक्का निर्माताओं की तरफ से कमजोर उठान के कारण चांदी की कीमत भी गिर गई है।
सर्राफा व्यापारियों ने सोने की कीमतों में उछाल का श्रेय त्योहारी और शादी-ब्याह के मौसम में बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए स्थानीय आभूषण विक्रेताओं की खरीदारी में तेजी को दिया, जिससे पीली धातु की कीमतों में तेजी को समर्थन मिला।
विदेशी बाजारों में मजबूती के रुख के बीच सोने और चांदी के तेवर मंगलवार को और कड़े हो गए। कीमतें नई ऊंचाई पर पहुंच गई। विदेशी बाजार कॉमेक्स में हाजिर सोना 2,350 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से 14 डॉलर अधिक है।
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