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ट्रेनिंग पूरी होने वाली थी, उससे पहले 22 वर्षीय अग्निवीर को आया हार्ट अटैक, हो गई मौत

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Jun 17, 2026 10:46 pm IST,  Updated : Jun 17, 2026 10:56 pm IST

एक 22 वर्षीय अग्निवीर जशनप्रीत सिंह की ट्रेनिंग के दौरान मौत हो गई। हार्ट अटैक पड़ने से उनका निधन हो गया। उनकी ट्रेनिंग उत्तर प्रदेश के फतेहगढ़ में चल रही थी।

अग्निवीर जशनप्रीत सिंह की मौत- India TV Hindi
अग्निवीर जशनप्रीत सिंह की मौत Image Source : REPORTER INPUT

भारतीय सेना के एक अग्निवीर जशनप्रीत सिंह की ट्रेनिंग के दौरान हार्ट अटैक से मौत हो गई। जशनप्रीत सिंह पंजाब के बरनाला के गांव बख्तगढ़ के रहने वाले थे, जिनकी उम्र 22 वर्ष थी। अग्निवीर जशनप्रीत सिंह का उत्तर प्रदेश के फतेहगढ़ स्थित आर्मी सेंटर में ट्रेनिंग चल रही थी। इसी दौरान हार्ट अटैक पड़ने से निधन हो गया।

जानकारी के मुताबिक, बूटा सिंह के पुत्र जशनप्रीत सिंह देश की रक्षा करने के सपने के साथ भारतीय सेना में बतौर अग्निवीर भर्ती हुए थे। उनकी ट्रेनिंग उत्तर प्रदेश के फतेहगढ़ में चल रही थी और वह अपनी इस कठिन ट्रेनिंग को लगभग पूरा करने वाले थे। जल्द ही वे देश सेवा में नियमित रूप से अपनी सेवाएं शुरू करने वाले थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

अचानक पड़ा दिल का दौरा

बताया जा रहा है कि ट्रेनिंग के दौरान अचानक जशनप्रीत सिंह की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें दिल का दौरा पड़ा। सैन्य अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें बचाने के लिए तमाम हर संभव प्रयास किए, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

हार्ट अटैक से अग्निवीर जशनप्रीत सिंह की मौत
Image Source : REPORTER INPUTहार्ट अटैक से अग्निवीर जशनप्रीत सिंह की मौत

शोक में डूबा परिवार और इलाका

महज 22 वर्ष की आयु में इस जवान की असमय मृत्यु से हंसते-खेलते परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।

कौन होते हैं अग्निवीर?

बता दें कि अग्निवीर भारत सरकार की 'अग्निपथ योजना' के तहत भारतीय सेना (थल सेना, नौसेना और वायुसेना) में भर्ती होने वाले जवानों को कहा जाता है। केंद्र सरकार ने जून 2022 में इस योजना की शुरुआत की थी। अग्निवीरों की कुल नौकरी 4 साल की होती है, जिसमें शुरुआती 6 महीने की ट्रेनिंग भी शामिल है। 4 साल की सेवा पूरी होने के बाद सभी अग्निवीरों के कार्यकाल की समीक्षा की जाती है। उनके प्रदर्शन, अनुशासन और सेना की जरूरतों के आधार पर 25% अग्निवीरों को सेना में स्थाई कर दिया जाता है, जो आगे 15 साल तक देश की सेवा करते हैं। बाकी बचे 75% अग्निवीरों को ससम्मान सेवामुक्त कर दिया जाता है, जिन्हें पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों और विभिन्न राज्य सरकारों की नौकरियों में प्राथमिकता मिलती है।

(रिपोर्ट- परवीन ऋषि)

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