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राजस्थान हाई कोर्ट का 21 मीटर ऊंचा डोम कभी भी गिर सकता है! IIT बॉम्बे की रिपोर्ट, अदालत ने लिया स्वतः संज्ञान

 Written By: Malaika Imam
 Published : Aug 11, 2026 06:01 pm IST,  Updated : Aug 11, 2026 06:03 pm IST

IIT बॉम्बे की रिपोर्ट में डोम के ढहने की आशंका जताते हुए निरीक्षण किए गए करीब 40% हिस्से को कंक्रीट स्पॉलिंग के लिहाज से संवेदनशील बताया गया है।

Rajasthan High Court- India TV Hindi
राजस्थान हाई कोर्ट Image Source : REPORTER INPUT

राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ के भवन की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर हाई कोर्ट ने बेहद गंभीर रुख अपनाया है। करीब 21 मीटर ऊंचे सेंट्रल डोम को लेकर IIT बॉम्बे की विशेषज्ञ राय में इसके कभी भी ढहने की आशंका जताई गई है। इसे देखते हुए जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने पूरे मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायालय परिसर में मौजूद लोगों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट भवन का स्ट्रक्चरल कार्य वर्ष 2013 के अंत तक पूरा हुआ था और दिसंबर 2019 में भवन को सुपुर्द किया गया था। उद्घाटन के कुछ ही वर्षों में भवन में गंभीर संरचनात्मक और रखरखाव संबंधी कमियां सामने आने लगीं।

कई हिस्सों में छत और फॉल्स सीलिंग गिरने की घटनाएं

कोर्ट ने अपने आदेश में वर्ष 2023 से सामने आई घटनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि कोर्ट नंबर 2, 9, 16 और चेंबर नंबर 16 में छत गिरने से फॉल्स सीलिंग क्षतिग्रस्त हुई। 29 अप्रैल 2023 को डोम का हिस्सा गिर गया। इसके बाद सिविल मिसलेनियस अपील सेक्शन, बिल सेक्शन, लिफ्ट के पास, कोर्ट नंबर 19 और अन्य हिस्सों में भी छत, प्लास्टर और फॉल्स सीलिंग गिरने की घटनाएं हुईं। कोर्ट ने भवन में लगातार सीपेज, खराब गुणवत्ता वाले सेनेटरी पाइप व फिटिंग, ड्रेनेज की खामियों और आग से सुरक्षा की अपर्याप्त व्यवस्था को गंभीर समस्या माना है।

IIT बॉम्बे ने 40 फीसदी क्षेत्र को बताया संवेदनशील

हालिया स्ट्रक्चरल ऑडिट में IIT बॉम्बे ने पाया कि भवन की खराब स्थिति के पीछे सीवर में जंग, कार्बोनेशन और कुछ हिस्सों में क्लोराइड का असर प्रमुख कारण है। निरीक्षण किए गए क्षेत्रों में करीब 40 प्रतिशत हिस्सा कंक्रीट स्पॉलिंग के लिहाज से संवेदनशील पाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, नमी और सीपेज बढ़ने पर जंग की प्रक्रिया तेज हो सकती है और कंक्रीट का हिस्सा बिना स्पष्ट चेतावनी के अचानक गिर सकता है।

IIT रिपोर्ट में जंग और कंक्रीट की खामियां

आईआईटी जोधपुर की विशेषज्ञ समिति ने वर्ष 2023 में जांच के दौरान स्लैब के कंक्रीट कवर में भारी जंग, स्टील रीबार में क्षरण, कंक्रीट में दरारें और छत की वॉटरप्रूफिंग में खामियां पाई थीं। रिपोर्ट में कुछ ही वर्षों में जंग की प्रक्रिया तेजी से बढ़ने पर चिंता जताई गई थी।

मरम्मत पर 57.65 करोड़ का अनुमान

आरएसआरडीसी ने उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर भवन की संरचनात्मक मरम्मत और रेट्रोफिटिंग के लिए करीब 57.65 करोड़ रुपये का अनुमान तैयार किया है। इसमें बीम, कॉलम और स्लैब से जुड़े गंभीर संरचनात्मक दोषों, सीपेज व दीवारों की खराब स्थिति तथा एवं कम गंभीर खामियों को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है।

डोम क्षेत्र सील, 24 घंटे मॉनिटरिंग के निर्देश

कोर्ट के निर्देश पर डोम के गोलाकार खुले हिस्से को बैरिकेड कर दिया गया है। आरएसआरडीसी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को रेट्रोफिटिंग प्लान तैयार करने और सीपेज एवं प्लंबिंग लीकेज तत्काल दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। सेंट्रल डोम और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों की 24 घंटे निगरानी के लिए विशेषज्ञ स्ट्रक्चरल इंजीनियरों की टीम लगाने को कहा गया है।

24 अगस्त को आला अधिकारी होंगे पेश

कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को 24 अगस्त तक विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें मुख्य सचिव, वित्त और पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव, आरएसआरडीसी के प्रबंध निदेशक, डीजीपी, सीपी जोधपुर और IIT बॉम्बे के प्रतिनिधियों सहित संबंधित विशेषज्ञों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है।

(रिपोर्ट- चन्द्रशेखर व्यास)

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