Saturday, February 21, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. धर्म
  3. त्योहार
  4. Hariyali Teej Vrat Katha: हरियाली तीज के दिन जरूर पढ़ें माता पार्वती और भगवान शिव के पुनर्मिलन की ये पावन कथा

Hariyali Teej Vrat Katha: हरियाली तीज के दिन जरूर पढ़ें माता पार्वती और भगवान शिव के पुनर्मिलन की ये पावन कथा

Written By: Laveena Sharma @laveena1693 Published : Jul 26, 2025 05:00 pm IST, Updated : Jul 26, 2025 05:00 pm IST

हिंदू धर्म में हर व्रत से जुड़ी कोई न कोई कथा होती है जिसे व्रत रखने वालों के लिए पढ़ना जरूरी माना जाता है। 27 जुलाई को हरियाली तीज है ऐसे में इस दिन से जुडी भी एक पौराणिक कथा है जिसे व्रती महिलाओं को जरूर सुनना या पढ़ना चाहिए।

hariyali teej katha- India TV Hindi
Image Source : SORA AI हरियाली तीज व्रत कथा

Hariyali Teej Vrat Katha: हरियाली तीज पर हरे रंग का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए इस दिन ज्यादातर महिलाएं हरे रंग की साड़ी और हरी चूड़ियां जरूर पहनती हैं। इसके अलावा ये रंग अखंड सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है। ऐसे में इस शुभ दिन पर इस रंग के कपड़े पहनने से महिलाओं के सुहाग को लंबी आयु की प्राप्ति होती है। इस दिन महिलाएं व्रत रहती हैं और शुभ मुहूर्त में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। इसके अलावा इस दिन से जुड़ी पौराणिक कथा जरूर पढ़ती हैं। यहां हम आपके लिए लेकर आएं हैं हरियाली तीज की पावन कथा।

हरियाली तीज की व्रत कथा (Hariyali Teej Vrat Katha)

हरियाली तीज की पौराणिक कथा अनुसार माता सती ने हिमालय राज के घर पर माता पार्वती के रूप में जन्म लिया और उन्होंने बचपन में ही भगवान शिव को पति के रूप में पाने की पूरी कामना कर ली थी। जब माता पार्वती शादी योग्य हुईं तो उनके पिता उनकी शादी के लिए योग्य वर की तलाश में लग गए। एक दिन नारद मुनि पर्वत राज हिमालय के घर आए और उन्होंने पार्वती जी के विवाह के लिए भगवान विष्णु का नाम सुझाया। हिमालय राज ने तुरंत अपनी बेटी की शादी के लिए अपनी रजामंदी दे दी। जब माता पार्वती को ये बात पता चली तो वो चिंतित हो गईं। जिसके बाद माता पार्वती भगवान शिव को पाने के लिए एकांत जंगल में जाकर कठोर तपस्या करने लगीं। वहां उन्होंने रेत से शिवलिंग का निर्माण किया और सच्चे मन से अराधना की।

इसके बाद माता की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें उनकी इच्छा पूरी होने का आशीर्वाद दिया। जब पर्वतराज हिमालय को अपनी बेटी के मन की बात पता चली तो उन्होंने भी भगवान शिव को दामाद के रूप में स्वीकार कर लिया। कहते हैं तभी से इस दिन को हरियाली तीज के रूप में मनाया जाने लगा।

यह भी पढ़ें:

हरियाली तीज पूजा विधि और मुहूर्त

कृष्ण जन्माष्टमी कब है 2025 में?

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Festivals से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें धर्म

Advertisement
Advertisement
Advertisement