1. Hindi News
  2. धर्म
  3. त्योहार
  4. Jitiya Kab Hai 2025: जितिया कब है 14 या 15 सितंबर? नोट कर लें जीवित्पुत्रिका व्रत की तारीख और पूजा मुहूर्त

Jitiya Kab Hai 2025: जितिया कब है 14 या 15 सितंबर? नोट कर लें जीवित्पुत्रिका व्रत की तारीख और पूजा मुहूर्त

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Published : Sep 09, 2025 09:56 am IST,  Updated : Sep 09, 2025 01:43 pm IST

Jitiya (Jivitputrika) Vrat Kab Hai 2025: पितृ पक्ष में महिलाएं अपनी संतानों की सुरक्षा और अच्छे स्वास्थ्य के लिए जितिया व्रत रखती हैं। जिसे जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जाना जाता है। जानिए इस साल जितिया पर्व कब मनाया जा रहा है।

jitiya kab hai- India TV Hindi
जितिया कब है 2025 में Image Source : FREEPIK

Jitiya (Jivitputrika) Vrat Kab Hai 2025: जीवित्पुत्रिका व्रत आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतानों की लंबी आयु और सुखी जीवन की कामना से पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं। ऐसी मान्यता है कि जो भी स्त्री ये व्रत श्रद्धापूर्वक करती है उसकी संतान दीर्घायु, निरोगी, तेजस्वी और सुख-सम्पन्न होती है। यह उपवास मुख्य रूप से बिहार, झारखण्ड और उत्तर प्रदेश की महिलाओं द्वारा किया जाता है। नेपाल में भी ये व्रत बेहद लोकप्रिय है। चलिए आपको बताते हैं 2025 में जितिया व्रत कब पड़ रहा है।

जितिया कब है 2025 (Jitiya Kab Hai 2025 Mein)

जितिया यानी जीवित्पुत्रिका व्रत इस साल 14 सितंबर 2025, रविवार को रखा जाएगा। अष्टमी तिथि 14 सितंबर की सुबह 05:04 से लेकर 15 सितंबर की सुबह 03:06 बजे तक रहेगी।

जितिया पूजा मुहूर्त 2025 (Jitiya Puja Muhurat 2025)

  • ब्रह्म मुहूर्त 04:33 ए एम से 05:19 ए एम
  • प्रातः सन्ध्या 04:56 ए एम से 06:05 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त 11:52 ए एम से 12:41 पी एम
  • विजय मुहूर्त 02:20 पी एम से 03:09 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त 06:27 पी एम से 06:51 पी एम
  • सायाह्न सन्ध्या 06:27 पी एम से 07:37 पी एम
  • अमृत काल 11:09 पी एम से 12:40 ए एम, सितम्बर 15
  • निशिता मुहूर्त 11:53 पी एम से 12:40 ए एम, सितम्बर 15
  • रवि योग 06:05 ए एम से 08:41 ए एम

जितिया व्रत पूजन विधि (Jitiya Puja Vidhi In Hindi)

  • इस दिन माताएं सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद घर के मंदिर में धूप, दीप, आरती करें और इसके बाद भोग लगाएं। 
  • फिर मिट्टी और गाय के गोबर से चील और सियारिन की मूर्ति तैयार करें।
  • फिर कुशा से बनी जीमूतवाहन की प्रतिमा को धूप, दीप, चावल, पुष्प आदि चढ़ाएं।
  • फिर विधि विधान पूजा करें और जितिया व्रत की कथा सुनें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

यह भी पढ़ें:

पितृ पक्ष लगते ही त्रिपिंडी श्राद्ध की क्यों होने लगती है चर्चा, जानिए कब, कैसे और किन्हें कराना चाहिए ये श्राद्ध

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Festivals से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें धर्म