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कार्तिक अमावस्या की रात भटक गई थीं मां लक्ष्मी, पृथ्वी लोक पर एक वृद्धा के दीपक ने दिखाया रास्ता, जानें पौराणिक कथा

 Written By: Arti Azad
 Published : Nov 07, 2026 07:12 pm IST,  Updated : Nov 07, 2026 07:12 pm IST

Kartik Amavasya 2026 Vrat Katha In Hindi: कार्तिक अमावस्या पर दीप जलाने और लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए घरों और कार्य स्थलों पर दीपक जलाए जाते हैं। आखिर इस दिन पर दीप जलाने की परंपरा क्यों शुरू हुई और मां लक्ष्मी की पूजा का क्या महत्व है? पढ़िए पौराणिक कथा

Kartik Amavasya Ki Katha- India TV Hindi
कार्तिक अमावस्या की पौराणिक कथा Image Source : PINTEREST

Kartik Amavasya 2026 Vrat Katha In Hindi: कार्तिक अमावस्या को दीप जलाने और लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन घरों से लेकर दुकानों और कार्य स्थलों तक दीपक जलाकर रोशनी की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक अमावस्या की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी लोक का भ्रमण करती हैं। इस तिथि से जुड़ी एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है। आइए जानते हैं कार्तिक अमावस्या की कथा का महत्व और दीप जलाने की परंपरा से जुड़ा संदेश।

कार्तिक अमावस्या की पौराणिक कथा

कार्तिक मास को धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है। इस महीने की अमावस्या पर दीप जलाने और मां लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार कार्तिक अमावस्या की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी लोक का भ्रमण करने निकलीं। उस समय चारों ओर घना अंधकार छाया हुआ था। रास्ता साफ दिखाई नहीं देने के कारण देवी भटक गईं। उन्होंने सोचा कि रात यहीं बिताकर सुबह होने पर बैकुंठ लौट जाएंगी।

मां लक्ष्मी ने ठहरने के लिए जगह तलाशनी शुरू की, लेकिन उन्हें कहीं आश्रय नहीं मिला। लोग अपने-अपने घरों के दरवाजे बंद करके सो चुके थे। तभी अंधेरे के बीच उन्हें एक छोटी-सी झोपड़ी दिखाई दी, जिसके बाहर दीपक जल रहा था। झोपड़ी का दरवाजा भी खुला हुआ था। दीपक की रोशनी देखकर मां लक्ष्मी उस झोपड़ी के पास पहुंचीं। वहां एक वृद्ध महिला रहती थी। देवी ने उससे कहा कि वह अंधेरी रात में रास्ता भटक गई हैं और उन्हें रात बिताने के लिए आश्रय चाहिए।

वृद्ध महिला ने उन्हें अतिथि समझकर आदरपूर्वक अपने घर में ठहरने के लिए कहा। उसने देवी को आश्वासन दिया कि वह उनके भोजन और आराम की व्यवस्था करेगी। वृद्धा के पास भले ही साधन सीमित थे, लेकिन उसके मन में अतिथि के प्रति सम्मान और सेवा का भाव था। उसके इस व्यवहार से प्रसन्न होकर मां लक्ष्मी रात में उसी झोपड़ी में विश्राम करने लगीं। वृद्ध महिला ने भी उनकी पूरी देखभाल की। रात बीत गई, लेकिन वृद्धा को यह पता नहीं था कि उसके घर आई अतिथि वास्तव में स्वयं मां लक्ष्मी थीं।

अगली सुबह जब वृद्ध महिला की आंख खुली, तो वह अपने घर का बदला हुआ रूप देखकर हैरान रह गई। उसकी साधारण झोपड़ी एक सुंदर और भव्य महल जैसी बन चुकी थी। घर में धन-धान्य और सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं थी। वृद्ध महिला समझ नहीं पा रही थी कि रातोंरात यह सब कैसे हो गया। वह मन ही मन उस अतिथि को याद करने लगी, जिसे उसने पिछली रात अपने घर में ठहराया था।

तभी मां लक्ष्मी ने उसे स्वप्न में दर्शन दिए और बताया कि वह कार्तिक अमावस्या की रात रास्ता भटककर उसके घर आई थीं। वृद्ध महिला के प्रेम, सेवा और सत्कार से प्रसन्न होकर उन्होंने उसे सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया था।

दीपक जलाने की परंपरा से जुड़ी मान्यता

कथा के अनुसार, मां लक्ष्मी ने कहा कि जिस तरह वृद्ध महिला ने अंधेरी रात में दीपक जलाकर प्रकाश फैलाया, उसी तरह कार्तिक अमावस्या पर दीप जलाने वाले लोगों पर भी उनकी कृपा बनी रहेगी। इसी मान्यता के चलते इस दिन घरों में दीपक जलाए जाते हैं और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

धार्मिक मान्यताओं में मां लक्ष्मी को चंचला भी कहा जाता है यानी कि धन और समृद्धि हमेशा एक ही स्थान पर टिके नहीं रहते। इसलिए जीवन में परिश्रम, सदाचार और अच्छे कर्मों का महत्व समझना जरूरी है।

कथा से मिलती है ये सीख

वृद्ध महिला के पास अधिक धन-संपत्ति नहीं थी, लेकिन उसने अपनी सामर्थ्य के अनुसार अतिथि का आदर किया। कार्तिक अमावस्या की इस कथा का संदेश केवल दीपक जलाने तक सीमित नहीं है। यह दूसरों की सहायता करने, अतिथि का सम्मान करने और निःस्वार्थ भाव से सेवा करने की प्रेरणा भी देती है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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