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Navratri Navami 2026 Katha, Aarti, Mantra Live: नवमी कितने बजे तक रहेगी? जानिए मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र, कथा, आरती समेत संपूर्ण जानकारी

 Written By: Naveen Khantwal
 Updated : Mar 27, 2026 10:42 am IST

Mahanavami Puja Vidhi, Aarti Live: चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है और इस दिन को महानवमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा कैसे करनी है, पूजन की विधि क्या है और किन मंत्रों के जप से आप माता सिद्धिदात्री को प्रसन्न कर सकते हैं, आइए जानते हैं।

Mahanavami 2026- India TV Hindi
महानवमी 2026 Image Source : FREEPIK

Mahanavami Puja Vidhi, Aarti Live: महानवमी के दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इस दिन को दुर्गा नवमी, चैत्र नवमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा करने से आपको माता का आशीर्वाद और सिद्धियां प्राप्त होती हैं। ऐसे में आइए जान लेते हैं कि माता सिद्धिदात्री को प्रसन्न करने के लिए किस शुभ मुहूर्त में आपको पूजा करनी चाहिए, किन मंत्रों का जप करना चाहिए, माता को प्रसन्न करने के लिए किस आरती का पाठ आपको करना चाहिए और सबकुछ। 

महानवमी पूजा विधि 

  • नवरात्रि के आखिरी दिन यानि महानवमी को सुबह जल्दी उठकर आपको स्नान ध्यान करना चाहिए। 
  • इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके पूजा स्थल की भी सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें। 
  • इसके बाद पूजा स्थल पर बैठकर पूजा के स्थान पर माता सिद्धिदात्री की फोटो या प्रतिमा आपको स्थापित करनी चाहिए। 
  • इसके बाद माता के समक्ष धूप-दीप आपको जलाना चाहिए। 
  • अब मां सिद्धिदात्री का कुमकुम, रोली और अक्षत से तिलक करें। 
  • माता को लाल फूल (गुड़हल) आपको अर्पित करना चाहिए। 
  • इसके बाद माता को हलवा, पूरी, चना, खीर आदि भी आपको अर्पित करना चाहिए। 
  • पूजा के दौरान माता के मंत्रों का जप करें और साथ ही दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। 
  • इसके बाद अंत में माता की आरती करें और फिर कन्या पूजन शुरू करें। 
  • कन्याओं के पैर धुलाकर उन्हें आसान पर बैठाकर हलवा, पूरी, खीर, चना आदि खिलवाएं। 
  • इसके बाद उनके हाथों को स्वच्छ करवाएं और फिर उनसे आशीर्वाद लें। 
  • कन्याओं को विदा करने से पहले उनको यथासंभव उपहार भी अवश्य दें। 
  • अंत में खुद भी प्रसाद ग्रहण करके नवरात्रि पूजन की समाप्ति करें। 

महानवमी पूजा का शुभ मुहूर्त 

  • ब्रह्म मुहूर्त 05:03 ए एम से 05:50 ए एम
  • प्रातः सन्ध्या 05:26 ए एम से 06:37 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त 12:19 पी एम से 01:08 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त 06:50 पी एम से 07:13 पी एम
  • सायाह्न सन्ध्या 06:51 पी एम से 08:02 पी एम

Mahanavami Puja Vidhi, Aarti Live: महानवमी के दिन सिद्धिदात्री माता को प्रसन्न करने के लिए पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, आरती

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  • 10:17 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Navratri Kab Khatam Hogi: नवरात्रि कब खत्म होगी

    नवरात्रि का समापन 27 मार्च 2026 को होगा। इस दिन लोग अपने नवरात्रि व्रत का पारण कर लेंगे। 

  • 9:39 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Chaitra Navratri Bhog: चैत्र नवरात्रि का प्रिय भोग

    चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री को काले चने, हलवे, खीर पूरी का भोग लगाया जाता है। कहा जाता है कि इस भोग से देवी शीघ्र ही प्रसन्न हो जाती हैं।

  • 9:18 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Mata Ke Mantra: मां सिद्धिदात्री पूजा मंत्र

    सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।

    सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

  • 9:04 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    नवरात्रि व्रत का पारण कब है 2026 (Navratri Vrat Ka Paran Kab Hai 2026)

    इस साल चैत्र नवरात्रि व्रत का पारण 27 मार्च 2026 को किया जाएगा। इस दिन आप सुबह 10 बजकर 6 मिनट के बाद कभी भी पारण कर सकते हैं क्योंकि इतने बजे से दशमी तिथि शुरू हो जाएगी। वहीं जो श्रद्धालु नवमी पर पूरे दिन व्रत रहते हैं वो इस व्रत का पारण 28 मार्च 2026 को करेंगे। इस दिन व्रत पारण का समय सुबह 8 बजकर 45 मिनट तक ही रहेगा।

  • 8:21 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    मां दुर्गा की आरती

    जय अम्बे गौरी मैया जय मंगल मूर्ति ।
    तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिव री ॥टेक॥
     
    मांग सिंदूर बिराजत टीको मृगमद को ।
    उज्ज्वल से दोउ नैना चंद्रबदन नीको ॥जय॥
     
    कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै।
    रक्तपुष्प गल माला कंठन पर साजै ॥जय॥
     
    केहरि वाहन राजत खड्ग खप्परधारी ।
    सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुःखहारी ॥जय॥
     
    कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती ।
    कोटिक चंद्र दिवाकर राजत समज्योति ॥जय॥
     
    शुम्भ निशुम्भ बिडारे महिषासुर घाती ।
    धूम्र विलोचन नैना निशिदिन मदमाती ॥जय॥
     
    चौंसठ योगिनि मंगल गावैं नृत्य करत भैरू।
    बाजत ताल मृदंगा अरू बाजत डमरू ॥जय॥
     
    भुजा चार अति शोभित खड्ग खप्परधारी।
    मनवांछित फल पावत सेवत नर नारी ॥जय॥
     
    कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती ।
    श्री मालकेतु में राजत कोटि रतन ज्योति ॥जय॥
     
    श्री अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावै ।
    कहत शिवानंद स्वामी सुख-सम्पत्ति पावै ॥जय॥

  • 7:50 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    हवन आहुति मंत्र

    • ॐ प्रजापतये स्वाहा, इदम् प्रजापतये न मम। - इस मन्त्र का उच्चारण करते हुये अग्नि में एक बूंद घी डालें और ये सोचें कि अग्नि के माध्यम से आप अपनी सम्पूर्ण चेतना प्रजापति को समर्पित कर रहे हैं।
    • ॐ इन्द्राय स्वाहा, इदम् इन्द्रयै न मम। - इस मन्त्र का उच्चारण करते हुये अग्नि में एक बूंद घी डालें और मन ही मन ये सोचें कि आप अपनी प्रेरित दृष्टिकोण की क्षमता इन्द्र को समर्पित कर रहे हैं।
    • ॐ अग्नये स्वाहा, इदं अग्नये न मम। - इस मन्त्र का उच्चारण करते हुये अग्नि में एक बूंद घी डालें और मन ही मन ये सोचें कि आप अपनी तार्किक और सुव्‍यवस्थित वैचारिक क्षमता अग्निदेव को समर्पित कर रहे हैं।
    • ॐ सोमाय स्वाहा, इदं सोमाय न मम। - इस मन्त्र का उच्चारण करते हुये अग्नि में एक बूंद घी डालें और मन ही मन ये सोचें कि आप अपनी भावना सोमदेव को समर्पित कर रहे हैं।
    • ॐ भूर्भुवस्सुवः स्वाहा। - इस मन्त्र का उच्चारण करते हुये अग्नि में एक बूंद घी डालें और मन ही मन ये सोचें कि आप अपनी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक सत्ता को प्रजापति को समर्पित कर रहे हैं।
    • ॐ गं गणपतये नमः स्वाहा। - इस मन्त्र का उच्चारण करते हुये अग्नि में एक बूंद घी डालें और मन ही मन ये सोचें कि आप अपनी योजना बनाने और बाधाओं को पार करने की योग्यता गणेश जी को समर्पित कर रहे हैं।
    • ॐ वं वरुणाय नमः स्वाहा। - इस मन्त्र का उच्चारण करते हुये अग्नि में एक बूंद घी डालें और मन ही मन ये सोचें कि आप अपनी दृण रहने और समस्याओं से निपटने की योग्यता वरुण देव को समर्पित कर रहे हैं।
    • अत्र आगच्छ। आवाहिता भव। - नीचे दिए गए मन्त्र का उच्चारण करते हुये ये सोचें कि भगवान गणेश हवन की दिव्य अग्नि में प्रवेश करके आपकी आहुतियां स्वीकार कर रहे हैं।
    • ॐ लं पृथिव्यात्मिकायै नमः - अब इस मन्त्र का उच्चारण करते हुये अग्नि में चन्दन अर्पित करना है।
    • ॐ हं आकाशात्मिकायै नमः - इस मंत्र का उच्चारण करते हुये हवन में पुष्प अर्पित करें।
    • ॐ यं वाय्वात्मिकायै नमः - इस मन्त्र का उच्चारण करते हुये धूपबत्ती प्रज्वलित करके हवनकुण्ड के पास रखें।
    • ॐ रं अग्न्यात्मिकायै नमः - इस मन्त्र का उच्चारण करते हुये हवन कुण्ड को दीपक दिखायें।
    • ॐ वं जलात्मिकायै नमः - इस मन्त्र का उच्चारण करते हुये किसी भी एक फल का टुकड़ा, किशमिश और भोग के लिए बनाया गया भोजन हवन में अर्पित करें।
  • 7:25 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Navrarti Navami 2026: चैत्र नवरात्रि का नौवें दिन किसकी पूजा होती है?

    नवरात्रि के नौवें दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री रूप की पूजा होती है। मां सिद्धिदात्री कमल पर विराजमान रहती हैं और शेर की सवारी भी करती हैं। मां की चार भुजाएं हैं जिनमें दाहिने हाथ में उन्होंने गदा लिया हुआ है दूसरे दाहिने हाथ में चक्र है। देवी का यह नौवां स्वरूप सभी तरह की सिद्धियों को देने वाला माना गया है।

  • 6:50 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    नवरात्रि हवन सामग्री लिस्ट (Navratri Havan Samagri List)

    हवनकुण्ड, घी या तिल का तेल, हवन में घी डालने के लिये एक चम्मच, जल अर्पित करने हेतु एक पात्र और चम्मच, कपूर, माचिस, कुछ सूखे गोले, गाय के गोबर के उपले, तिल अथवा, काजू, बादाम।

  • 6:27 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Aaj Navami Kab Tak Hai: आज नवमी कब तक है?

    आज नवमी तिथि सुबह 10 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। इसके बाद दशमी लग जाएगी।

  • 9:44 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    महानवमी के दिन किस रंग के कपड़े पहनें

    महानवमी के दिन आपको लाल या मैरून रंग के कपड़े पहनने चाहिए। इसके साथ ही पीले या जामुनी रंग के कपड़े पहनना भी इस दिन शुभ माना जाता है। 

  • 9:25 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    महानवमी के दिन करें ये उपाय, धन-धान्य की होगी प्राप्ति

    महानवमी के दिन माता दुर्गा के सिद्धिदात्री रूप की पूजा करना तो बेहद शुभ होता ही है साथ ही इस दिन एक ऐसा उपाय भी जो शिव जी से जुड़ा है और जिसे करने धन-धान्य की आपको प्राप्ति होती है। 
    उपाय- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महानवमी के दिन आपको लौंग का एक जोड़ा शिवलिंग पर अर्पित करना चाहिए, ऐसा करने से आर्थिक लाभ आपको प्राप्त होता है। 

  • 9:08 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Navratri 2026: महानवमी के दिन कलश विसर्जन करते समय करें इस मंत्र का जप

    कलश विसर्जन करते समय नीचे दिए गए मंत्र का जप करना चाहिए- 

    मंत्र- गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठ, स्वस्थानं परमेश्वरी, पूजाराधनकाले च पुनरागमनाय च।

  • 8:30 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: कन्या पूजन के दौरान न करें ये गलतियां

    • कन्या पूजन वाले दिन आपको तामसिक भोजन करने से बचना चाहिए। 
    • कन्या पूजन के दौरान किसी भी कन्या के साथ अनादर न करें साथ ही भेदभाव करने से भी बचें। 
    • वरात्रि में गलती से भी दस साल से ज्यादा की कन्याओं को पूजा में न बुलाएं। 
    • कन्या पूजन के बाद कन्याओं को गलती से भी खाली हाथ न भेजें। कन्याओं से आशीर्वाद लेने के बाद उनको उपहार स्वरूप कुछ न कुछ अवश्य दें।
  • 8:02 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    महानवमी के दिन राहुकाल का समय, इस दौरान गलती से भी न करें पूजा, दान और धार्मिक अनुष्ठान

    दिल्ली- सुबह 10:54 से दोपहर 12:27 तक
    मुंबई- दोपहर पहले 11:13 से दोपहर 12:44 तक
    चंडीगढ़- सुबह 10:56 से दोपहर 12:29 तक
    लखनऊ- सुबह 10:40 से दोपहर 12:12 तक
    भोपाल- सुबह 10:54 से दोपहर 12:26 तक
    कोलकाता- सुबह 10:10 से दोपहर पहले 11:42 तक
    अहमदाबाद- दोपहर पहले 11:13 से दोपहर 12:45 तक
    चेन्नई- सुबह 10:43 से दोपहर 12:14 तक

  • 7:23 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: मां सिद्धिदात्री कवच

    ॐकारः पातु शीर्षो माँ, ऐं बीजम् माँ हृदयो।
    हीं बीजम् सदापातु नभो गृहो च पादयो॥
    ललाट कर्णो श्रीं बीजम् पातु क्लीं बीजम् माँ नेत्रम् घ्राणो।
    कपोल चिबुको हसौ पातु जगत्प्रसूत्यै माँ सर्ववदनो॥

  • 7:03 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: माता सिद्धिदात्री का प्रार्थना मंत्र

    माता सिद्धिदात्री के प्रार्थना मंत्र का जप करने से मां की असीम कृपा आप पर बरसती है। 

    प्रार्थना मंत्र-  'सिद्ध गंधर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥'

  • 6:24 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: मां सिद्धिदात्री स्तुति मंत्र

    या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

  • 6:06 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    माता सिद्धिदात्री की आराधना से कौन सी सिद्धियां प्राप्त होती हैं?

    माता सिद्धिदात्री की पूजा से नीचे दी गई सिद्धियां प्राप्त होती हैं। 

    • अणिमा
    • महिमा
    • गरिमा
    • लघिमा
    • प्राप्ति
    • प्राकाम्य
    • ईशित्व
    • वशित्व
  • 5:36 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Kalash Visrajan Muhurt: कलश विसर्जन मुहूर्त

    27 मार्च की सुबह 10 बजकर 9 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजे तक भक्त कलश विसर्जन कर सकते हैं। वहीं जिन लोगों ने 9 दिवसीय व्रत लिया है उनको कलश विसर्जन 28 तारीख की सुबह करना चाहिए। 28 मार्च को दशमी तिथि सुबह 8 बजकर 48 मिनट तक रहेगी इसलिए इस समय तक आपको विसर्जन कर लेना चाहिए क्योंकि इसके बाद एकादशी तिथि लग जाएगी। 

  • 5:01 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    कन्या पूजन क्यों किया जाता है?

    10 वर्ष से छोटी कन्याओं को माता दुर्गा का रूप माना जाता है। इसलिए नवरात्रि के दौरान कन्याओं का पूजन करने से उनका आशीर्वाद लेने से शुभ फल प्राप्त होते हैं और साथ ही माता दुर्गा भी प्रसन्न होती हैं। कन्या पूजन से घर में सुख-समृद्धि भी आती है। 

  • 4:30 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    नवरात्रि की पूजा में कौन से फल नहीं चढ़ाने चाहिए

    नवरात्रि के दौरान अष्टमी और नवमी की पूजा में गलती से भी आपको कुछ फलों को नहीं चढ़ाना चाहिए, इन फलों के बारे में नीचे बताया गया है। 

    • नींबू 
    • इमली
    • सूखा नारियल
    • नाशपाती और अंजीर
    • इन चीजों को माता को अर्पित करना शुभ नहीं माना जाता।
  • 4:06 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    महानवमी के दिन हवन का शुभ मुहूर्त

    हवन मुहूर्त- सुबह 6 बजकर 17 मिनट से सुबह 10 बजकर 54 मिनट तक

  • 3:37 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: महानवमी पर करें श्री दुर्गा स्तुति का पाठ

    मंत्र 

    सर्व मंगल मांगल्ए शिवे सर्वार्थ साधिके,
    शरण्ए त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।

    श्री दुर्गा स्तुति

    जय जग जननी आदि भवानी,
    जय महिषासुर मारिणी मां ।
    उमा रमा गौरी ब्रह्माणी,
    जय त्रिभुवन सुख कारिणी मां ।।

    हे महालक्ष्मी हे महामाया,
    तुम में सारा जगत समाया ।
    तीन रूप तीनों गुण धारिणी,
    तीन काल त्रैलोक बिहारिणी ।।

    हरि हर ब्रह्मा इंद्रादिक के,
    सारे काज संवारिणी माँ ।
    जय जग जननी आदि भवानी,
    जय महिषासुर मारिणी मां

    शैल सुता मां ब्रह्मचारिणी,
    चंद्रघंटा कूष्मांडा माँ ।
    स्कंदमाता कात्यायनी माता,
    शरण तुम्हारी सारा जहां।।

    कालरात्रि महागौरी तुम हो
    सकल रिद्धि सिद्धि धारिणी मां
    जय जग जननी आदि भवानी
    जय महिषासुर मारिणी माँ

    अजा अनादि अनेका एका,
    आद्या जया त्रिनेत्रा विद्या।
    नाम रूप गुण कीर्ति अनंता,
    गावहिं सदा देव मुनि संता।।

    अपने साधक सेवक जन पर,
    सुख यश वैभव वारिणी मां ।।
    जय जगजननी आदि भवानी,
    जय महिषासुर मारिणी मां।।

    दुर्गति नाशिनी दुर्मति हारिणी दुर्ग निवारण दुर्गा मां,
    भवभय हारिणी भवजल तारिणी सिंह विराजिनी दुर्गा मां ।
    पाप ताप हर बंध छुड़ाकर जीवो की उद्धारिणी माँ,
    जय जग जननी आदि भवानी जय महिषासुर मारिणी माँ।।

  • 3:17 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Mahanavami 2026: महानवमी पर इन चीजों का दान करने से मिलेंगे शुभ फल

    • फल और अनाज
    • अन्न और वस्त्र दान
    • श्रृंगार का सामान
    • सफेद तिल और चावल
    • सुहाग सामग्री और लाल वस्त्र
    •  केसर, हल्दी, बेसन, चने की दाल या पीले फल
  • 2:50 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: महानवमी के दिन कन्या पूजन की विधि

    • कन्या पूजन से पहले माता रानी की विधि विधान पूजा करें और साथ ही हवन करें।
    • इसके बाद 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को घर बुलाएं। इस बात का ध्यान रखें कि कन्याओं के साथ एक बालक जरूर हो।
    • घर आई बालिकाओं के सबसे पहले पैर धोएं।
    • फिर उन्हें बैठने के लिए एक साफ आसन दें। 
    • अब उन्हें कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाएं।
    • इसके बाद हाथों में कलावा बांधें।
    • फिर उनकी आरती उतारें।
    • फिर कन्याओं को हलवा, पूरी और चना खिलाएं।
    • इसके बाद उन्हें उपहार या दक्षिणा दें।
    • फिर उनका पैर छूकर उनका प्राप्त करें।
    • कन्याओं के साथ माता रानी के जयकारे लगाएं।
    • इस बात का ध्यान रखें कि कन्या पूजन के बाद घर में झाड़ू नहीं लगाना है।
  • 2:32 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navaratri 2026: माता सिद्धिदात्री को अर्पित करें इन चीजों का भोग

    • हलवा-पूरी और चना 
    • नारियल
    • सफेद मिठाई या फिर गाय के दूध से बनी खीर
    • फल और तिल
  • 1:58 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri Navami Puja: मां सिद्धिदात्री की आरती

     

    जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दातातू

    भक्तों की रक्षक तू दासों की माता,

    तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि

    तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि!!

    कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम

    जब भी हाथ सेवक के सर धरती हो तुम,

    तेरी पूजा में तो न कोई विधि है

    तू जगदम्बे दाती तू सर्वसिद्धि है!!

    रविवार को तेरा सुमरिन करे जो

    तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो,

    तुम सब काज उसके कराती हो पूरे

    कभी काम उसके रहे न अधूरे!!

    तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया

    रखे जिसके सर पर मैया अपनी छाया,

    सर्व सिद्धि दाती वो है भाग्यशाली

    जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली!!

    हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा

    महा नंदा मंदिर में है वास तेरा,

    मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता

    वंदना है सवाली तू जिसकी दाता!!

  • 1:37 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Maa Siddhidatri Mantra: मां सिद्धिदात्री के मंत्र

    • ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः
    • सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
    • या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
    • ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:
  • 1:22 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: मां सिद्धिदात्री की कथा

    देवी पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, माता सिद्धिदात्री की कृपा से ही भोलेनाथ ने सिद्धियों को प्राप्त किया था। धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि माता सिद्धिदात्री के प्रताप से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हो गया था, इसलिए भगवान शिव अर्द्धनारीश्वर कहलाए। नवरात्रि के नवें दिन माता दुर्गा के सिद्धिदात्री रूप की पूजा की जाती है। इनकी पूजा से भक्तों की मनोकामनाएं तो पूरी होती ही हैं साथ ही सिद्धियां भी भक्त प्राप्त करते हैं। माता का ध्यान करने से पारलौकिक अनुभव भक्तों को प्राप्त होते हैं। माता की आराधना मनुष्यों के साथ गधर्व, देवता, यक्ष, असुरों द्वारा भी पूजी जाती हैं। माता की पूजा से अष्ट सिद्धियां- अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, ईशित्व और वशित्व की प्राप्ति भी होती है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, मधु-कैटभ नामक राक्षसों के अत्याचारों से देवताओं को बचाने के लिए त्रिदेवों ने माता सिद्धिदात्री को प्रकट किया था और माता ने महिषासुर का वध कर संसार का कल्याण किया। 

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