गुजरात की संस्कृति और परंपरा से जुड़ा रांधण छठ पर्व माता शीतला को समर्पित है। इस पर्व पर महिलाएं परिवार की सुख समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से पूजा करती हैं। इस दिन अगले दिन के लिए भोजन पहले से तैयार करने की परंपरा है, क्योंकि शीतला सातम पर चूल्हा जलाना शुभ नहीं माना जाता। मान्यता अनुसार, शीतला माता की पूजा करने से परिवार को रोग और मौसमी बीमारियों से सुरक्षा मिलती है। यहां जानिए रांधण छठ पूजा विधि और मुहूर्त।
रांधण 2026 छठ कब है?
इस साल रांधण छठ बुधवार, 2 सितंबर को मनाई जाएगी। इसके अगले दिन गुरुवार, 3 सितंबर को शीतला सातम का पर्व होगा। पंचांग के अनुसार, षष्ठी तिथि 2 सितंबर को सुबह 6 बजकर 12 मिनट से शुरू होगी और 3 सितंबर को सुबह 4 बजकर 25 मिनट तक रहेगी। कल हलषष्ठी पर्व भी मनाया जाएगा।
रांधण छठ 2026 शुभ मुहूर्त
- रांधण छठ पर ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 29 मिनट से 5 बजकर 14 मिनट तक रहेगा।
- प्रातः सन्ध्या का समय सुबह 4 बजकर 51 मिनट से 5 बजकर 59 मिनट तक है।
- अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 55 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।
- विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 28 मिनट से 3 बजकर 19 मिनट तक रहेगा।
- गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 43 मिनट से 7 बजकर 5 मिनट तक रहेगा।
- सायाह्न सन्ध्या शाम 6 बजकर 43 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक रहेगी।
- अमृत काल शाम 7 बजकर 42 मिनट से रात 9 बजकर 15 मिनट तक रहेगा।
ऐसे करें रांधण छठ की पूजा
रांधण छठ के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर या पूजा स्थल पर माता शीतला की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। माता को जल, फूल, हल्दी, रोली और अक्षत अर्पित करें। इसके बाद परिवार की सुख-शांति और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।
लगाएं ठंडे भोजन का भोग
इस पर्व की खास परंपरा के अनुसार शीतला माता को पहले से तैयार किए गए भोजन का भोग लगाया जाता है। इसमें दही भात, पूड़ी, मिठाई और अन्य पारंपरिक पकवान शामिल किए जा सकते हैं। कई परिवारों में ढोकला, थेपला और ढेबरा जैसे व्यंजन भी तैयार किए जाते हैं। पूजा के दौरान शीतला माता चालीसा या स्तोत्र का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।
शीतला सातम से जुड़ी परंपरा
रांधण छठ पर शीतला सातम के लिए पूरा भोजन तैयार कर लिया जाता है। इसके बाद चूल्हे की सफाई की जाती है। शीतला सातम पर पूरे दिन पहले से तैयार ठंडा भोजन ग्रहण किया जाता है।
पूजा के बाद क्या करें
पूजा संपन्न होने के बाद माता को अर्पित जल का घर और परिवार के सदस्यों पर छिड़काव करने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे घर का वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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