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Adhik Maas 33 Malpua Daan: अधिकमास में नहीं कर पाए 33 मालपुए का दान, तो सोमवती अमावस्या पर ऐसे करें यह महादान

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Published : Jun 11, 2026 09:29 am IST,  Updated : Jun 15, 2026 08:36 am IST

Adhik Maas 33 Malpua Daan: शास्त्रों अनुसार अधिकमास में 33 मालपुए का दान करने से दुख, दरिद्रता और संकटों का नाश हो जाता है। साथ ही सभी देवी-देवताओं की एक साथ विशेष कृपा प्राप्त होती है। मालपुए को घी, गुड़ या शक्कर और आटे से तैयार किया जाता है।

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अधिक मास में मालपुए का दान Image Source : INDIA TV

Adhik Maas 33 Malpua Daan: क्या आपने अधिकमास में 33 मालपुए दान करने के बारे में सुना है? ये इस पावन महीने का एक ऐसा महादान है जो भगवान श्रीहरि विष्णु की असीम कृपा दिला सकता है। कहते हैं जो भी श्रद्धालु इस महीने में कभी भी घी, गुड़ और आटे से बने मालपुए का दान करता है उसके जीवन में दरिद्रता कभी नहीं आती। अगर आपने अभी तक ये दान नहीं किया है तो अधिक मास की अमावस्या पर तो जरूर ही इसका दान करें। बता दें अधिक अमावस्या 15 जून 2026, सोमवार को मनाई जा रही है। चलिए जानते हैं इस दान का महत्व और नियम।

क्यों किया जाता है 33 मालपुए का दान?

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Image Source : INDIA TVअधिक अमावस्या पर मालपुए के दान का महत्व

अधिकमास में 33 मालपुओं का दान भगवान विष्णु और 33 कोटि देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जाता है। मान्यता है कि अधिकमास में 33 मालपुए का दान करने से सभी देवी-देवता एक साथ प्रसन्न हो जाते हैं जिससे दरिद्रता, रोग और नकारात्मकता का नाश हो जाता है। कहते हैं अधिकमास की अमावस्या पर यह महादान करने से पूरे महीने की पूजा और दान का फल एक साथ प्राप्त हो जाता है।

अधिक अमावस्या पर 33 मालपुए दान करने की विधि

  • शास्त्रों के अनुसार 33 मालपुए का दान कांसे के बर्तन में करना सबसे उत्तम माना जाता है। लेकिन अगर कांसे का बर्तन नहीं है तो आप इसकी जगह पर मिट्टी के नए पात्र, पीतल के बर्तन या फिर बांस की टोकरी का ही इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • शुद्ध घी, गुड़ और आटे से ये मालपुए तैयार किए जाते हैं। आप गुड़ की जगह शक्कर या चीनी भी ले सकते हैं। ध्यान रहे कि दान करने वाले मालपुए की संख्या 33 होनी चाहिए।
  • दान करने से पहले भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि विधान पूजा करें। सबसे पहले मालपुए भगवान के समक्ष रखें। फिर हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर मन ही मन ये प्रार्थना करें कि 'मैं अपने और अपने परिवार के कल्याण के लिए अधिकमास का यह महादान करने जा रहा/रही हूं।' 
  • मालपुए के साथ अपनी श्रद्धा के अनुसार कुछ पैसे भी अवश्य रखें। साथ ही तुलसी का पत्ता रखना भी न भूलें।
  • पूजा के बाद इस पात्र को किसी ब्राह्मण को दान कर दें। 
  • दान देने के बाद ब्राह्मण के पैर छूकर उनका आशीर्वाद जरूर लें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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