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आषाढ़ अमावस्या पर सपने में पूर्वजों का दिखना शुभ या अशुभ? स्वप्न शास्त्र से समझें संकेत और करें ये विशेष उपाय

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Jul 14, 2026 06:08 pm IST,  Updated : Jul 14, 2026 06:08 pm IST

आषाढ़ अमावस्या पर सपने में पूर्वजों का दिखना खास संकेत माना जाता है। अलग-अलग तरह के सपनों के अलग अर्थ बताए गए हैं। पितरों की कृपा पाने के लिए कुछ उपाय करने की मान्यता है। स्वप्न शास्त्र से जानते है ऐसे सपने का क्या इशारा हो सकता है और क्या उपाय करने चाहिए।

 Seeing Ancestors in Dreams- India TV Hindi
Seeing Ancestors in Dreams Image Source : MAGNIFIC

आषाढ़ अमावस्या का पितरों के स्मरण और उनकी शांति के निमित्त किए जाने वाले उपायों के लिए विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर आषाढ़ अमावस्या के समय आपको सपने में पूर्वज दिखाई दें तो इसे सामान्य बात नहीं है। इसे कुछ विशेष संकेतों से जोड़कर देखा जाता है। स्वप्न शास्त्र से जानिए ऐसे सपनों के अर्थ। साथ ही पितरों की प्रसन्नता पाने के लिए इस दिन कुछ उपाय भी बताए गए हैं।

आषाढ़ अमावस्या का महत्व

आषाढ़ अमावस्या पितरों की स्मृति और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने का महत्वपूर्ण अवसर मानी जाती है। इस दिन लोग तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य जैसे धार्मिक कार्य करते हैं। मान्यता है कि इन कर्मों से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।

सपने में मुस्कुराते हुए पितृ दखने का अर्थ

स्वप्न शास्त्र के अनुसार अगर अमावस्या के आसपास या इस दिन सपने में पूर्वज प्रसन्न या मुस्कुराते हुए दिखाई दें, तो इसे शुभ संकेत माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यह सपना इस बात का प्रतीक हो सकता है कि पितृ आपके कार्यों से संतुष्ट हैं और उनका आशीर्वाद आपके साथ है।

पितृ को भोजन मांगते देखने का मलब?

अगर सपने में पूर्वज भोजन या जल मांगते हुए दिखाई दें, तो इसे उनकी तृप्ति से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि ऐसे में तर्पण, पिंडदान या ब्राह्मण भोजन कराने का प्रयास करना शुभ होता है। इससे पितरों की संतुष्टि और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

ये उपाय माने जाते हैं शुभ

अगर अमावस्या के दिन ऐसा सपना आए, तो स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर सूर्यदेव को जल अर्पित करें। इसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल में काले तिल और कुश मिलाकर पितरों का तर्पण करें। यह उपाय पितृ कृपा प्राप्ति का माध्यम माना जाता है।

दान और दीपदान का महत्व

आषाढ़ अमावस्या पर जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। शाम के समय दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का दीपक जलाने या पीपल के पेड़ के पास दीपदान करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि ऐसे उपाय पितरों के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं। साथ ही परिवार में सुख-शांति और सकारात्मकता बनाए रखने में मददगार होते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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