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Astrology predictions: घर से दूर रहकर मिलेगी जीवन में सफलता, कुंडली में बन रहे हैं अगर ये 3 योग

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Jun 12, 2026 04:58 pm IST,  Updated : Jun 12, 2026 04:58 pm IST

Astrology predictions:ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में मौजूद कुछ विशेष योग व्यक्ति को घर से दूर रहकर सफलता दिलाने वाले होते हैं। आज हम आपको इन्हीं योगों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।

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ज्योतिष शास्त्र Image Source : MAGNIFIC

Astrology predictions: वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली को देखकर न केवल आपके व्यक्तित्व और भूत-भविष्य का पता चलता है बल्कि करियर, भौतिक सुख, प्रेम और सफल होने के स्थान की जानकारी भी कुंडली से मिलती है। ऐसे में आज हम आपको कुंडली के उन विशेष योगों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका कुंडली में होना आपको घर से दूर रहकर सफलता दिलाने वाला माना जाता है। आइए विस्तार से जानते हैं इसके बारे में। 

कुंडली का द्वादश भाव और घर से दूर रहकर सफलता के योग 

कुंडली के द्वादश भाव या 12वें भाव को विदेश और लंबी दूरी की यात्राओं का कारक माना जाता है। अगर इस भाव का स्वामी कर्म के भाव (10वें भाव) या भाग्य भाव (9वें भाव) में बैठा हो तो जातक को घर से दूर रहकर ही स्थायी सफलता मिलने के योग रहते हैं। ऐसे लोग विदेशों में जाकर भी ख्याति पाते हैं और संभव है कि विदेशों में ही ऐसे लोग बस भी जाएं। हालांकि साथ में यह देखना भी जरूरी होता है कि द्वादश भाव का स्वामी कुंडली में कितना मजबूत है। द्वादश भाव का स्वामी जितना मजबूत होगा विदेशों में सफलता के उतने ही अधिक चांस रहेंगे। 

लग्नेश और चंद्रमा की स्थिति से बनने वाला योग

जिन लोगों की कुंडली में लग्न भाव का स्वामी या चंद्रमा तीसरे और नवम भाव में हो, या चंद्रमा और लग्न पर राहु केतु का प्रभाव हो तो जातक को जीवन में सफलता तब ही प्राप्त होती है जब वो अपने जन्म स्थान से दूर जाता है। ऐसे लोगों के विदेश जाने के योग कम हो सकते हैं लेकिन अपने देश में ही किसी अन्य प्रांत में जाकर इनको जीवन में सफलता जरूर मिलती है। लग्नेश और चंद्रमा यदि मजबूत हों तो घर से दूर रहकर ऐसे लोग ख्याति अर्जित करते हैं। 

कुंडली का चतुर्थ भाव 

कुंडली के चौथे भाव को आपकी मातृभूमि का कारक माना जाता है। यह इस भाव पर क्रूर ग्रहों का प्रभाव है तो व्यक्ति घर पर रहकर सफलता अर्जित नहीं कर पाता। यानि चतुर्थ भाव राहु-केतु, शनि और सूर्य के प्रभाव में हो तो पैतृक स्थान से व्यक्ति को ज्यादातर निराशा ही हाथ लगती है। हालांकि जैसे ही ये लोग घर से बाहर निकलते हैं सफलता इनके कदम चूमने लगती है। यानि चतुर्थ भाव की विपरीत स्थिति व्यक्ति को विदेशों में या घर से दूर रहकर बड़ी सफलता दिला सकती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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