सावन का महीना भगवान शिव को अति प्रिय है। धार्मिक मान्यता है कि सावन माह में भगवान शिव और माता पार्वती के साथ पृथ्वीलोक पर आते हैं। ऐसे में इस महीने में शिव-शक्ति की उपासना करने से कई गुना अधिक शुभ फलों की प्राप्ति होती है। 10 अगस्त 2026 को सावन माह का दूसरा सोमवार है। सावन सोमवार के दिन शिवलिंग का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करने के साथ ही मंत्र जाप करने से भक्तों पर महादेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसके अलावा सावन सोमवार की पूजा भगवान शिव की आरती के बिना पूर्ण नहीं मानी जाती है। तो सावन सोमवार के दिन शिवजी की यह आरती जरूर करें।
॥ भगवान गंगाधर आरती ॥
ॐ जय गंगाधर जय हर जय गिरिजाधीशा।
त्वं मां पालय नित्यं कृपया जगदीशा॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
कैलासे गिरिशिखरे कल्पद्रुमविपिने।
गुन्जति मधुकरपुन्जे कुन्जवने गहने॥
कोकिलकूजित खेलत हन्सावन ललिता।
रचयति कलाकलापं नृत्यति मुदसहिता॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
तस्मिन्ल्ललितसुदेशे शाला मणिरचिता।
तन्मध्ये हरनिकटे गौरी मुदसहिता॥
क्रीडा रचयति भुषारज्जित निजमीशम्।
इन्द्रादिक सुर सेवत नामयते शीशम्॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
बिबुधबधू बहु नृत्यत हृदये मुदसहिता।
किन्नर गायन कुरुते सप्त स्वरसहिता॥
धिनकत थै थै धिनकत मृदङ्ग वादयते।
क्वण क्वण ललिता वेणुं मधुरं नाटयते॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
रुण रुण चरणे रचयति नूपुरमुज्ज्वलिता।
चक्रावर्ते भ्रमयति कुरुते तां धिक तां॥
तां तां लुप चुप तां तां डमरू वादयते।
अङ्गुष्ठांगुलिनादं लासकतां कुरुते॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
कर्पूरघुतिगौरं पन्चाननसहितम्।
त्रिनयनशशिधरमौलिं विषधरकण्ठयुतम्॥
सुन्दरजटायकलापं पावकयुतभालम्।
डमरुत्रिशूलपिनाकं करधृतनृकपालम्॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
मुण्डै रचयति माला पन्नगमुपवीतम्।
वामविभागे गिरिजारूपं अतिललितम्॥
सुन्दरसकलशरीरे कृतभस्माभरणम्।
इति वृषभध्वजरूपं तापत्रयहरणम्॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
शङ्खनिनदम् कृत्वा झल्लरि नादयते।
नीराजयते ब्रह्मा वेद-ऋचां पठते॥
अतिमृदुचरणसरोजं हृत्कमले धृत्वा।
अवलोकयति महेशं ईशं अभिनत्वा॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
ध्यानं आरति समये हृदये अति कृत्वा।
रामस्त्रिजटानाथं ईशं अभिनत्वा॥
सन्गतिमेवं प्रतिदिन पठनं यः कुरुते।
शिवसायुज्यं गच्छति भक्त्या यः श्रृणुते॥
॥ॐ हर हर हर महादेव॥
भगवान शिव के इन मंत्रों का जाप करें
शिव मूल-
मंत्रॐ नमः शिवाय॥
महामृत्युञ्जय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
रुद्र गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
शिव गायत्री मंत्र
ॐ महादेवाय विद्महे रुद्रमूर्तये धीमहि
तन्नः शिवः प्रचोदयात्॥
दक्षिणामूर्ति शिव मंत्र
ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्तये।
मह्यं मेधां प्रज्ञां प्रयच्छ स्वाहा॥
नीलकंठ महादेव मंत्र
ॐ नमो नीलकण्ठाय।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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