Budh Pradosh 2026 Vrat Katha, Shubh Muhurat: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत की बड़ी महिमा बताई गई है। ये व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। कहते हैं जो भी श्रद्धालु इस व्रत को सच्चे मन से रखता है उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। आज यानी 15 अप्रैल 2026 को बुध प्रदोष व्रत है। ये व्रत सुख-समृद्धि में वृद्धि करता है। साथ ही कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति मजबूत करता है। इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। चलिए अब जानते हैं बुध प्रदोष व्रत की पूजा का मुहूर्त और पावन कथा।
बुध प्रदोष व्रत मुहूर्त (Budh Pradosh Vrat Muhurat 2026)
बुध प्रदोष व्रत पूजा का मुहूर्त 15 अप्रैल 2026 की शाम 06:47 से रात 09 बजे तक रहेगा। वहीं त्रयोदशी तिथि 15 अप्रैल को 12:12 AM से रात 10:31 बजे तक रहेगी।
बुध प्रदोष व्रत 2026 की कथा (Budh Pradosh Vrat Katha)
बुध प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा अनुसार एक गांव में एक आदमी रहता था जिसकी हाल ही में शादी हुई थी। शादी के कुछ दिनों बाद वो अपनी पत्नी को लेकर उसके मायके गया। लेकिन जिस दिन वो पत्नी को ले जाने की सोच रहा था उस दिन बुधवार था। लड़के के ससुराल वालों ने उसे समझाया कि बुधवार के दिन बेटी को विदा करके नहीं ले जाते। लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी और जबरदस्ती लड़की की विदाई करवा ली। दोनों पति-पत्नी अपनी यात्रा पर निकल पड़े। कुछ ही दूर जाने पर पत्नी को प्यास लगने लगी तो लड़का लोटा लेकर पानी की खोज में निकल पड़ा।
जब वह वापस आया तो उसने देखा कि उसकी पत्नी उसके जैसे दिखने वाला एक आदमी से बातें कर रही हैं और उसके लोटे से पानी भी पी रही है। वह तुरंत वहां पहुंच गया और पत्नी भी ये देखकर हैरान रह गई। दोनों पुरुष आपस में झगड़ने लगे। देखते ही देखते भीड़ जमा हो गई। लोगों ने उस महिला से अपने पति को पहचानने के लिए कहा। लेकिन पत्नी पहचान नहीं कर पाई क्योंकि दोनों बिल्कुल एक जैसे ही दिख रहे थे। उस समय उस पुरुष को अपनी गलती समझ आ गई कि वह परिवार के बुजुर्गों के मना करने पर भी अपनी पत्नी को बुधवार के दिन लेकर निकल पड़ा।
उसने इसके बाद सच्चे मन से भगवान शिव से मांफी मांगी। उसकी प्रार्थना सुनकर भोलेनाथ ने तुरंत ही दूसरे हमशक्ल को गायब कर दिया। अब दोनों पति-पत्नी सकुशल घर लौट आए। इसके बाद से दोनों ने विधि-विधान से प्रदोष व्रत रखना शुरू कर दिया।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
यह भी पढ़ें:
शनिश्चरी अमावस्या क्यों है खास? इस दिन कर लें ये चमत्कारी उपाय, शनि की साढ़े साती से मिलेगा छुटकारा!