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Ashtami Havan Muhurat, Vidhi 2026: नवरात्रि की अष्टमी को हवन कब और कैसे करें? यहां जानिए पूरी विधि और शुभ मुहूर्त

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Published : Mar 25, 2026 02:01 pm IST,  Updated : Mar 25, 2026 02:04 pm IST

Ashtami Havan Muhurat, Vidhi 2026: नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर मां महागौरी की पूजा होती है। इस दिन कई लोग हवन पूजन करके अपने नवरात्रि व्रत का पारण कर लेते हैं। चलिए आपको बताते हैं अष्टमी पर हवन करने का शुभ मुहूर्त और विधि क्या रहेगी।

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अष्टमी हवन मुहूर्त और विधि Image Source : CANVA

Ashtami Havan Muhurat, Vidhi 2026: बिना हवन के नवरात्रि की पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती। यही कारण है कि नवरात्रि की अष्टमी और नवमी को श्रद्धालु हवन जरूर करते हैं। धार्मिक मान्यताओं अनुसार हवन न केवल वातावरण को शुद्ध करता है बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा भी लाता है। साथ ही हवन पूजन से माता रानी भी प्रसन्न हो जाती हैं। यही कारण है कि भक्त कन्या पूजन से पहले विधि विधान हवन जरूर करते हैं और माता से पूजा के दौरान हुई गलतियों की क्षमा मांगते हैं। जो लोग नवरात्रि की अष्टमी को हवन कर रहे हैं, जानें उनके लिए हवन का मुहूर्त क्या रहने वाला है।

अष्टमी हवन मुहूर्त 2026 (Ashtami Havan Muhurat 2026)

अष्टमी पर हवन करने का शुभ मुहूर्त 26 मार्च 2026 की सुबह 06:20 से 10:45 बजे तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:50 PM बजे तक रहेगा। आप अपनी सुविधानुसार इनमें से किसी भी मुहूर्त में हवन कर सकते हैं।

हवन के लिए आवश्यक सामग्री (Havan Samagri List)

  • हवन कुंड
  • आम की सूखी लकड़ियां
  • काला तिल
  • सूखा नारियल 
  • कलावा और लाल कपड़ा
  • जौ, चावल, शक्कर और घी
  • कपूर, गुग्गल, लोबान और पंचमेवा

हवन की विधि (Havan Ki Vidhi)

  1. सबसे पहले स्वयं पर और हवन कुंड पर थोड़ा गंगाजल छिड़कें।
  2. फिर आम की लकड़ियों में कपूर की सहायता से अग्नि प्रज्वलित कर लें।
  3. अब ॐ गण गणपतये नमः स्वाहा कहते हुए पहली आहुति दें।
  4. इसके बाद नवग्रहों, कुलदेवता और भगवान शिव के नाम से भी आहुति दें।
  5. फिर मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करते हुए आहुति दें। यहां मां दुर्गा के किसी भी मंत्र से 108 बार आहुति देनी है।
  6. अंत में सूखे नारियल में घी भरकर उसे हवन कुंड के बीच में रख दें। इसे पूर्णाहूति कहते हैं, जिसका अर्थ है पूजा संपन्न हुई।
  7. हवन के बाद माता रानी की आरती करें।
  8. इसके बाद कन्या पूजन करें और फिर अपना व्रत खोल लें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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