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सूर्य पूजा सिर्फ सदियों पुरानी परंपरा नहीं, अर्घ्य देने से बढ़ती है साधक की कीर्ति और प्रतिष्ठा, ये है जल अर्पित करने का सही तरीका

 Written By: Arti Azad
 Published : Aug 08, 2026 11:42 pm IST,  Updated : Aug 08, 2026 11:42 pm IST

रविवार को सूर्य देव की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने की परंपरा है। इसे सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं माना जाता, बल्कि प्रतिष्ठा और सफलता से भी जोड़ा गया है। सूर्य को नियमित अर्घ्य देने से कुंडली में सूर्य मजबूत होता है और करियर, यश और कीर्ति से जुड़े लाभ मिल सकते हैं।

Surya Puja Benefits, Surya Arghya Rules- India TV Hindi
सूर्य को अर्घ्य देने के लाभ Image Source : PINTEREST

सूर्य पूजा सनातन धर्म की उन परंपराओं में शामिल है, जिसका पालन सदियों से किया जाता रहा है। भगवान भास्कर को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है और सूर्योदय के समय उन्हें जल अर्पित करने की परंपरा है। हालांकि, सूर्य को अर्घ्य देना सिर्फ एक धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मविश्वास, यश, कीर्ति और पद-प्रतिष्ठा का कारक बताया है। ऐसे में सूर्य पूजा को जीवन में सकारात्मक बदलाव और सफलता से जोड़कर देखा जाता है। जानिए सूर्य भगवान को अर्घ्य देने का सही तरीका

यश और प्रतिष्ठा से संबंध

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, नियमित रूप से सूर्य को जल अर्पित करने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है। कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होने पर व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान और प्रतिष्ठा मिल सकती है। सूर्य को अर्घ्य देने से साधक की कीर्ति बढ़ने और कार्यक्षेत्र में पहचान मिलने की मान्यता है। इसके अलावा करियर में तरक्की और सरकारा कामों में सहयोग मिलने के भी योग बनते हैं।

धन और संतान का सुख

सूर्य को जल अर्पित करने की परंपरा को धन-धान्य और संतान सुख से भी जोड़ा गया है। मान्यता है कि सूर्य देव की नियमित पूजा से व्यक्ति के जीवन में आत्मविश्वास बढ़ता है और वह अपने लक्ष्य की ओर बेहतर तरीके से आगे बढ़ पाता है।

ऐसे दें सूर्य देव को अर्घ्य

रविवार या प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद सूर्योदय के समय सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए। इसके लिए एक साफ लोटे में शुद्ध जल में लाल चंदन या रोली, लाल फूल डालें। थोड़ा गुड़ और गेहूं कुछ के दाने भी डाल सकते हैं। दोनों हाथों से लोटा पकड़कर "ओम सूर्याय नमः" या "ओम घृणि सूर्याय नमः" मंत्र का जाप करते हुए धीरे-धीरे जल अर्पित करें।

जल अर्पित करने वाले पात्र का भी महत्व

सूर्य को अर्घ्य देने के लिए तांबे का बर्तन सबसे शुभ माना जाता है। तांबा सूर्य देव की प्रिय धातु मानी गई है। अगर तांबे का लोटा उपलब्ध न हो तो पीतल का बर्तन का इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं लोहे, स्टील या प्लास्टिक के बर्तन से सूर्य को जल अर्पित करना शुभ नहीं माना जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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