Surya Puja Niyam: रविवार का दिन सूर्य देव की पूजा के लिए उत्तम माना जाता है। इस दिन सूर्य नारायण की आराधना करने से आरोग्य, मान-सम्मान में वृद्धि और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसके अलावा रविवार के दिन सूर्य मंत्र का जाप और आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करना भी फलदायी माना गया है। साथ ही सूर्य देव के 12 नामों का जाप करना भी लाभदायक होता है। तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि रविवार को सूर्य देव की पूजा का सही नियम क्या है और अर्घ्य देते समय कौनसी गलतिया नहीं करनी चाहिए।
सूर्य देव को अर्घ्य देने की सही विधि
- सूर्य देव को जल चढ़ाने के लिए हमेशा तांबे के लोटे का ही इस्तेमाल करें।
- तांबे के लोटे में जल भरे और उसमें लाल चंदन, लाल फूल, कुमकुम और थोड़ा अक्षत (चावल) डाल दें। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- लोटे को दोनों हाथों से पकड़कर अपने सिर के ऊपर रखें। जल की गिरती धारा के बीच से सूर्य देव के दर्शन करें।
- सूर्य देव को जल अर्पित करते समय 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' या 'ॐ सूर्याय नमः' मंत्र का कम से कम 3 बार जाप करें।
- सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। इससे आपको शुभ फलों की प्राप्ति होगी।
सूर्य देव को अर्घ्य देते समय न करें ये गलतियां
- सूर्य देव को जल अर्पित करते समय ध्यान रखें कि जल की धारा आपके पैरों पर न गिरे। इसके लिए नीचे कोई गमला या पात्र रख लें।
- सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए कभी भी स्टील, प्लास्टिक या कांच के बर्तन का प्रयोग न करें।
- सूर्य देव को दोपहर के समय जल न चढ़ाएं। अर्घ्य देने के लिए सूर्योदय के बाद का समय ही सबसे उत्तम माना जाता है।
- सूर्य देव को हमेशा स्नान आदि के बाद साफ-सुथरे वस्त्र पहने ही अर्घ्य दें।
- पूर्व दिशा की ओर मुख करके ही सूर्य देव को जल अर्पित करें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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