Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व 19 मार्च से शुरू होने वाला है। माता दुर्गा की पूजा के लिए नवरात्रि के नौ दिनों को बेहद शुभ माना जाता है। इन 9 दिनों में माता के नौ रूपों की बारी-बारी से पूजा की जाती है। हालांकि नवरात्रि के दौरान कुछ सावधानियां बरतना भी आवश्यक होता है। इस दौरान आपको मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए, घर को अस्वच्छ नहीं रखना चाहिए। इसके साथ ही माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा के दौरान कुछ चीजें अर्पित करने से आपको बचना चाहिए, आज इसी के बारे में हम आपको जानकारी देंगे।
तुलसी के पत्ते न करें माता दुर्गा को अर्पित
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता दुर्गा के चंडिका रूप को तुलसी की गंध पसंद नहीं है इसलिए मां दुर्गा की पूजा में भी तुलसी दल अर्पित करना सही नहीं माना जाता। दुर्गा पूजा के दौरान तुलसी के पत्ते मां को अर्पित करने से आपको प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल सकते हैं, इसलिए ऐसा करने से बचें।
धतूरा और मदार के फूल
माता दुर्गा की पूजा में धतूरा और मदार के फूल अर्पित करने से भी आपको बचना चाहिए, नहीं तो मां दुर्गा आप से रूठ सकती हैं। इसके साथ ही कनेर के फूल भी मां को अर्पित करना सही नहीं माना जाता।
तामसिक भोजन
ऐसा कोई भी भोजन मां को अर्पित न करें जो तामसिक प्रवृत्ति का होगा। प्याज, लहसुन से बने भोज्य पदार्थों को भी माता को अर्पित करने से बचें नहीं तो दिक्कतों का सामना आपको जीवन में करना पड़ सकता है।
बासी फल
कई लोग माता की पूजा तो विधि-विधान से करते हैं लेकिन बासी फल माता को अर्पित कर देते हैं। ऐसा करने से आपको बचना चाहिए। फल नहीं खरीद सकते तो आप चावल या घर में बना कोई सादा भोजन माता को चढ़ा सकते हैं लेकिन बासी फल गलती से भी मां को न चढ़ाएं।
माता के सामने न जलाएं खंडित दीपक
नवरात्रि की पूजा से पहले ही आपको मिट्टी का दीपक खरीद लेना चाहिए। बस इस बात का ख्याल रखें कि यह दीपक खंडित न हो, दीपक के खंडित होने से दुर्गा मां की पूजा करने के बाद भी आप मां के आशीर्वाद से वंचित रह सकते हैं।
कृत्रिम चीजों को माता से रखें दूर
कई लोग कृत्रिम फल, फूल और माला आदि नवरात्रि के दौरान माता को अर्पित कर देते हैं। ऐसा करना शास्त्रों के अनुसार सही नहीं माना जाता, ऐसा करने से माता प्रसन्न होने की बजा या आप से रूठ सकती हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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