गणेश चतुर्थी सनातन धर्म का एक बड़ा त्योहार है, जिसे गणेशोत्सव के नाम से भी जाना जाता है। इस साल यह पर्व 14 सितंबर से शुरू होकर 25 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान घरों, मंदिरों और पंडालों में श्रद्धालु गणेश भगवान की प्रतिमा स्थापित करते हैं। फिर शुभ मुहूर्त में इस प्रतिमा का विधि विधान विसर्जन भी किया जाता है। लेकिन गणेश चतुर्थी की पूजा या गणेश स्थापना में क्या-क्या सामग्री लगती है? आज हम आपको इसी बारे में बताएंगे।
गणेश चतुर्थी पूजन सामग्री
- भगवान गणेश की मिट्टी की मूर्ति
- चौकी
- लाल या पीला कपड़ा
- आम या अशोक के पत्ते (कलश के मुख्य द्वार पर सजाने हेतु)
- गंगाजल और साफ जल
- कलश (तांबे, पीतल या मिट्टी का)
- नारियल (कलश के ऊपर रखने के लिए, जटा वाला)
- दुर्वा
- आम या अशोक के पत्ते (कलश के मुख्य द्वार पर सजाने के लिए)
- गंगाजल और साफ जल
- पंचमेवा (काजू, बादाम, किशमिश, मखाना, छुहारा इत्यादि)
- दीपक (पीतल या मिट्टी का)
- रुई की बत्ती
- धूपबत्ती और अगरबत्ती
- कपूर
- माचिस
- कलावा
पंचामृत और अभिषेक सामग्री
- दूध
- दही
- घी
- शहद
- शक्कर
श्रृंगार सामग्री
- जनेऊ (कम से कम 2 जोड़े)
- लाल या पीला वस्त्र गणपति बाप्पा के लिए
- सिंदूर
- अक्षत
- चंदन
- अबीर, गुलाल और हल्दी
गणेश चतुर्थी भोग सामग्री
- मोदक
- बेसन या मोतीचूर के लड्डू
- ताजे फल
हवन और आरती सामग्री
- हवन कुंड
- हवन सामग्री
- कपूर और आरती की थाली
- घंटी और शंख
- आम की लकड़ी
गणेश चतुर्थी पूजा विधि
- गणेश चतुर्थी की पूजा के लिए घर की उत्तर-पूर्व दिशा में चौकी रखकर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
- चौकी पर थोड़े अक्षत रखकर, उस पर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें।
- फिर गणेश जी के दाहिनी ओर कलश स्थापित करें। इस कलश में जल, गंगाजल, सुपारी और सिक्का डालें। फिर उसके ऊपर आम के पत्ते और साथ ही एक नारियल रखें।
- फिर बप्पा को जल अर्पित करें
- उन्हें पंचामृत से स्नान कराएं।
- इसके बाद बप्पा को वस्त्र, जनेऊ, चंदन और सिंदूर अर्पित करें।
- इस दिन भगवान को दुर्वा भी जरूर अर्पित करें।
- फिर भगवान को मोदक, बेसन के लड्डू या फलों का भोग लगाएं।
- इसके बाद धूप-दीप दिखाकर पूरे परिवार के साथ बप्पा की आरती करें।
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