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Garun Puran: जीवन भर के कर्म और आखिरी समय की सोच तय करते हैं मनुष्य की अगली योनि, गरुड़ पुराण में मिलता है अगले जन्म का रहस्य

 Written By: Arti Azad
 Published : May 01, 2026 06:21 pm IST,  Updated : May 01, 2026 06:21 pm IST

Garun Puran: गरुड़ पुराण केवल एक धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शन करने वाला शास्त्र भी है। इसमें बताया गया है कि व्यक्ति के कर्म और अंतिम समय की सोच उसके अगले जन्म की दिशा तय करते हैं। यह ग्रंथ जीवन को सही तरीके से जीने की प्रेरणा देता है।

Garud Puran- India TV Hindi
गरुड़ पुराण में बताया है कैसे तय होती मनुष्य की अगली योनि Image Source : INDIA TV

Garun Puran: गरुड़ पुराण हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जो जीवन-मृत्यु और उसके बाद की अवस्थाओं को गहराई से समझाता है। इसमें विष्णु जी और उनके वाहन गरुड़ के बीच संवाद के रूप में कई रहस्यमयी और आध्यात्मिक बातें दी हैं। यह ग्रंथ कर्म, पाप-पुण्य, स्वर्ग-नरक और मोक्ष के सिद्धांतों को समझाता है। इसके अनुसार मनुष्य का अगली योनि उसके कर्मों और मृत्यु के समय की मानसिक स्थिति पर निर्भर करती है। तो चलिए जानते हैं इस बारे में विस्तार। 

मृत्यु के बाद क्यों होता है गरुड़ पुराण का पाठ

किसी परिजन की मृत्यु के बाद घर में इस ग्रंथ का पाठ करवाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इससे मृत आत्मा को शांति और परिवार के लोगों को जीवन के गहरे सत्य समझने का अवसर मिलता है। यह परंपरा लोगों को धर्म और कर्म के महत्व से जोड़ती है। ग्रंथ सिखाता है कि कैसे अच्छे कर्म करके व्यक्ति जीवन बेहतर बना सकता है। यह ग्रंथ मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा को भी विस्तार से समझाता है, जिससे व्यक्ति अपने कर्मों के प्रति जागरूकता होता है।

कर्म और अगला जन्म

गरुड़ पुराण के अनुसार, इंसान का अगला जन्म उसके कर्मों पर आधारित होता है। व्यक्ति जैसा कर्म करता है, वैसा ही फल उसे मिलता है। अच्छे कर्म करने वाले को सुखद परिस्थितियां मिलती हैं, जबकि बुरे कर्म करने वालों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

अंतिम समय की सोच का प्रभाव

ग्रंथ में बताया गया है कि मृत्यु के समय मन की स्थिति बहुत महत्वपूर्ण होती है। अगर उस समय व्यक्ति का मन शांत हो और वह ईश्वर का स्मरण कर रहा हो, तो उसे बेहतर जन्म प्राप्त होता है। वहीं अगर मन में नकारात्मकता, क्रोध या लालच हो तो इसका असर अगले जीवन पर पड़ सकता है।

अपने धर्म का अनादर

गरुड़ पुराण में दिया गया है कि जो लोग धर्म, वेद और भगवान का सम्मान नहीं करते और केवल भौतिक सुखों में लिप्त रहते हैं, उन्हें मृत्यु के बाद कष्ट झेलने पड़ते हैं। ऐसे लोगों का अगला जन्म संघर्ष और अभाव से भरा होता है।

छल और विश्वासघात

इस ग्रंथ के अनुसार, जो लोग अपने स्वार्थ के लिए दूसरों को धोखा देते हैं या छल-कपट करते हैं, उन्हें उनके कर्मों का दंड जरूर मिलता है। यह दंड केवल इस जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अगले जन्म में भी दिखाई देता है।

जीवन के अंतिम क्षण का मूल्य

गरुड़ पुराण के अनुसार जीवन का आखिरी समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। उस समय व्यक्ति के मन में जो विचार चलते हैं, वही उसके अगले जन्म की दिशा तय करते हैं। इसलिए पूरे जीवन अच्छे कर्म करने के साथ-साथ अंत समय में मन को शांत और सकारात्मक रखना बेहद जरूरी माना गया है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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