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आश्विन माह की पहली एकादशी कब है, पितृपक्ष से क्या है संबंध? जानें इंदिरा एकादशी 2026 की तारीख, मुहूर्त और महत्व

 Written By: Arti Azad
 Published : Sep 29, 2026 02:53 pm IST,  Updated : Sep 29, 2026 02:53 pm IST

आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी पितृपक्ष के दौरान पड़ती है। इस एकादशी का संबंध भगवान विष्णु की पूजा के साथ पितरों के तर्पण और श्राद्ध से भी जोड़ा जाता है। चलिए जानते हैं इंदिरा एकादशी व्रत 2026 कब रखा जाएगा।

Indira ekadashi 2026, इंदिरा एकादशी 2026- India TV Hindi
इंदिरा एकादशी 2026 कब है? Image Source : INDIA TV

सनातन धर्म में एकादशी तिथि भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष मानी जाती है। आश्विन कृष्ण पक्ष में आने वाली इंदिरा एकादशी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह पितृपक्ष के दौरान पड़ती है। इस दिन व्रत और विष्णु पूजा करने के साथ पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और दान किया जाता है। आइए जानते हैं साल 2026 में इंदिरा एकादशी कब है और इस दिन व्रत-पूजा से जुड़े प्रमुख मुहूर्त क्या हैं।

कब है इंदिरा एकादशी 2026? (India Ekadashi 2026 Date)

वैदिक पंचांग के अनुसार आश्विन कृष्ण एकादशी तिथि 6 अक्टूबर को रात 2:07 बजे शुरू होगी और 7 अक्टूबर को रात 12:34 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर इंदिरा एकादशी का व्रत 6 अक्टूबर, मंगलवार को रखा जाएगा।

पूजा का शुभ समय

  • इंदिरा एकादशी पर ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:39 से 5:28 बजे तक रहेगा। 
  • पूजा के लिए सुबह 9:13 बजे से दोपहर 1:37 बजे तक का समय बताया गया है। 
  • लाभ-उन्नति मुहूर्त 10:41 बजे से 12:09 बजे तक रहेगा। 
  • अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त 12:09 से 1:37 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त 11:46 बजे से 12:33 बजे तक है।

सर्वार्थ सिद्धि योग

इस बार इंदिरा एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। यह योग सुबह 6:17 बजे से रात 10:17 बजे तक रहेगा। इस योग को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। वहीं, राहुकाल दोपहर 3:05 से 4:33 बजे तक रहेगा।

कब होगा व्रत का पारण?

इंदिरा एकादशी व्रत का पारण 7 अक्टूबर, बुधवार को किया जाएगा। पारण का समय सुबह 6:17 से 8:38 बजे तक रहेगा। इस दिन द्वादशी तिथि का समापन सुबह 11:16 बजे होगा।

पितृपक्ष से क्या संबंध?

इंदिरा एकादशी पितृपक्ष के दौरान आती है, इसलिए इसका संबंध पितरों के स्मरण और श्राद्ध से भी माना जाता है। परंपरा के अनुसार जिन पूर्वजों का निधन एकादशी तिथि को हुआ हो, उनका श्राद्ध पितृपक्ष की एकादशी पर किया जाता है। इसे एकादशी श्राद्ध या ग्यारस श्राद्ध भी कहा जाता है। हालांकि सामान्य पितृपक्ष श्राद्ध मृत्यु तिथि के अनुसार ही किया जाता है, इसलिए हर परिवार के लिए इंदिरा एकादशी पर श्राद्ध करना जरूरी नहीं है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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