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कौवे का सिर पर बैठना क्या किसी अनहोनी का संकेत है? शकुन शास्त्र में छिपा है बड़ा रहस्य

 Written By: Arti Azad
 Published : Aug 15, 2026 08:39 pm IST,  Updated : Aug 15, 2026 08:39 pm IST

सनातन धर्म में कौवे का संबंध यमराज और शनि देव से माना जाता है। इसी वजह से कौवे के कुछ संकेतों को शकुन शास्त्र में शुभ-अशुभ नजरिए से देखा जाता है। इसी तरह सामान्य दिनों में सिर पर कौवे का बैठना क्या किसी अनहोनी का संकेत हो सकता है? जानिए इसके पीछे क्या है मान्यता।

crow sitting on head- India TV Hindi
सिर पर कौवा बैठना शुभ या अशुभ Image Source : PINTEREST

घर की छत, मुंडेर या आसपास कौवों का नजर आना आम बात है। लेकिन अगर अचानक कोई कौवा आपके सिर पर आकर बैठ जाए या छूकर निकल जाए, तो क्या इसे किसी अनहोनी का संकेत माना जाता है? शकुन शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं में कौवे से जुड़े कई संकेतों का उल्लेख मिलता है। हालांकि, इनका शुभ और अशुभ फल परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग बताया गया है। तो चलिए शकुन शास्त्र से जानते हैं कि कौवे का आपके सिर पर बैठना किस बात का संकेत हो सकता है। 

कौवा क्यों है खास?

सनातन धर्म की मान्यताओं की बात करें तो कौवे को यमराज का दूत और शनि देव से जुड़ा पक्षी माना जाता है। यही कारण है कि कौवे के व्यवहार को लेकर शकुन शास्त्र में अलग-अलग संकेत बताए गए हैं। 

सिर पर बैठे तो क्या मतलब?

अगर कौवा अचानक किसी व्यक्ति के सिर पर बैठ जाए तो इसे शुभ संकेत नहीं माना जाता। इसे आने वाले समय में परेशानी, मानसिक तनाव या आर्थिक नुकसान की आशंका से जोड़कर देखा जाता है। कुछ मान्यताओं में यह मान-सम्मान में कमी या जीवन में किसी बाधा का संकेत भी माना गया है।

शनि-राहु से संबंध

कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में कौवे के इस तरह सिर पर बैठने को शनि या राहु के नकारात्मक प्रभाव से भी जोड़ा जाता है। हालांकि, केवल कौवे के सिर पर बैठने की घटना के आधार पर किसी बड़ी अनहोनी की निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।

क्या करें उपाय?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसी स्थिति में व्यक्ति स्नान करके स्वयं को शुद्ध कर सकता है। इसके बाद कौवों और अन्य पक्षियों के लिए दाना-पानी रखने की परंपरा भी बताई गई है। हनुमान चालीसा का पाठ और अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को दान करना भी नकारात्मक प्रभावों को कम करने के उपायों में शामिल माना जाता है।

पितृ पक्ष में कौवे का महत्व

कौवे से जुड़े संकेतों का अर्थ परिस्थिति के अनुसार अलग-अलग माना जाता है। पितृ पक्ष में कौवों को भोजन कराने की परंपरा है। धार्मिक विश्वास है कि कौवे के जरिए पितरों तक भोजन पहुंचता है। इसलिए इस अवधि में कौवे को सम्मानपूर्वक भोजन कराया जाता है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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