Khatu Shyam Ji Ki Aarti PDF: खाटू श्याम बाबा महाभारत काल के एक महान योद्धा बर्बरीक हैं जो भीम के पोत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने भगवान कृष्ण को अपना शीश दान में दिया था जिससे प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें कलियुग में उनके नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था। यही कारण हैं कि बर्बरीक जी को श्याम बाबा के नाम से जाना जाने लगा। कहते हैं जो भक्त खाटू श्याम जी की सच्चे मन से भक्ति करता है उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। वहीं जो इनकी सुबह-शाम आरती करता है उसके जीवन में सुख-सुविधाओं की कभी कमी नहीं होती। यहां आप देखेंगे खाटू श्याम जी की आरती के लिरिक्स।
खाटू श्याम जी की आरती (Khatu Shyam Ji Ki Aarti)
- ॐ जय श्री श्याम हरे,
- बाबा जय श्री श्याम हरे ।
- खाटू धाम विराजत,
- अनुपम रूप धरे॥
- ॐ जय श्री श्याम हरे,
- बाबा जय श्री श्याम हरे ।
- रतन जड़ित सिंहासन,
- सिर पर चंवर ढुरे ।
- तन केसरिया बागो,
- कुण्डल श्रवण पड़े ॥
- ॐ जय श्री श्याम हरे,
- बाबा जय श्री श्याम हरे ।
- गल पुष्पों की माला,
- सिर पार मुकुट धरे ।
- खेवत धूप अग्नि पर,
- दीपक ज्योति जले ॥
- ॐ जय श्री श्याम हरे,
- बाबा जय श्री श्याम हरे ।
- मोदक खीर चूरमा,
- सुवरण थाल भरे ।
- सेवक भोग लगावत,
- सेवा नित्य करे ॥
- ॐ जय श्री श्याम हरे,
- बाबा जय श्री श्याम हरे ।
- झांझ कटोरा और घडियावल,
- शंख मृदंग घुरे ।
- भक्त आरती गावे,
- जय-जयकार करे ॥
- ॐ जय श्री श्याम हरे,
- बाबा जय श्री श्याम हरे ।
- जो ध्यावे फल पावे,
- सब दुःख से उबरे ।
- सेवक जन निज मुख से,
- श्री श्याम-श्याम उचरे ॥
- ॐ जय श्री श्याम हरे,
- बाबा जय श्री श्याम हरे ।
- श्री श्याम बिहारी जी की आरती,
- जो कोई नर गावे ।
- कहत भक्त-जन,
- मनवांछित फल पावे ॥
- ॐ जय श्री श्याम हरे,
- बाबा जय श्री श्याम हरे ।
- जय श्री श्याम हरे,
- बाबा जी श्री श्याम हरे ।
- निज भक्तों के तुमने,
- पूरण काज करे ॥
- ॐ जय श्री श्याम हरे,
- बाबा जय श्री श्याम हरे ।
- ॐ जय श्री श्याम हरे,
- बाबा जय श्री श्याम हरे।
- खाटू धाम विराजत,
- अनुपम रूप धरे॥
- ॐ जय श्री श्याम हरे,
- बाबा जय श्री श्याम हरे ।
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