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क्या है जम्मू-कश्मीर की मचैल यात्रा का धार्मिक महत्व जहां आज बादल फटने से मच गई तबाही

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Aug 14, 2025 03:40 pm IST,  Updated : Aug 14, 2025 05:39 pm IST

Machail Mata Mandir Jammu Kashmir: आज यानी 14 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में बादल फटने की घटना हुई जिससे मचैल यात्रा पर जा रहे कई लोग हादसे का शिकार हो गए। बता दें मचैल यात्रा जम्मू-कश्मीर के लोगों की धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र है इसलिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होते हैं।

machel mata madir- India TV Hindi
मचैल माता मंदिर Image Source : FACEBOOK

Machail Mata Mandir Jammu Kashmir: मचैल यात्रा जम्मू-कश्मीर की प्रसिद्ध तीर्थयात्रा है जो हर साल अगस्त में निकलती है। कुछ सालों पहले तक इस यात्रा में सिर्फ जम्मू-कश्मीर के लोग ही शामिल होते थे लेकिन अब धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ती जा रही है कि अब अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होने के लिए जम्मू पहुंचते हैं। बता दें जहां मचैल माता का मंदिर स्थित है वह स्थान अत्यंत सुंदर है और ऊंचे पहाड़ों से घिरा हुआ है। 

जम्मू-कश्मीर में कहां स्थित है मचैल माता मंदिर

मचैल माता मंदिर देवी दुर्गा का मंदिर है जो जम्मू क्षेत्र के किश्तवाड़ जिले के मचैल गांव में स्थित है। इस मंदिर का नाम भी इसी गांव के नाम पर रखा गया है। इस मंदिर के आस-पास ऊंचे पहाड़, ग्लेशियर, चेनाब नदी की सहायक नदियां और हरी-भरी घाटियां हैं। 

मचैल मंदिर का इतिहास

इस मंदिर का इतिहास 1834 ई. में जोरावर सिंह कालूरिया की लद्दाख विजय से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि लद्दाख के बोटी समुदाय की सेना से युद्ध करने से पहले उन्होंने मचैल माता का आशीर्वाद लिया था और युद्ध में सफलता के बाद वे माता के परम भक्त बन गए थे। हर साल अगस्त माह में यहां मचैल माता की पवित्र यात्रा होती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन हेतु आते हैं। कहते हैं भद्रवाह के ठाकुर कुलवीर सिंह द्वारा वर्ष 1987 से यहां 'छड़ी यात्रा' की परंपरा शुरू की, जो अब हर साल भद्रवाह के चिनोट से शुरू होकर मचैल तक जाती है। इस यात्रा के दौरान कई श्रद्धालु चमत्कारी अनुभवों की भी चर्चा करते हैं।

मचैल माता के मंदिर कैसे पहुंचें

  • जम्मू, उधमपुर, रामनगर और भद्रवाह से कई ट्रैवल एजेंट मचैल माता मंदिर पहुंचने के लिए बसों की व्यवस्था करते हैं और यहां टैक्सी की सुविधा भी उपलब्ध है।
  • जम्मू से गुलाबगढ़ (बेस कैंप) तक सड़क मार्ग से लगभग 290 किमी की दूरी है, जिसे तय करने में लगभग 10 घंटे लगते हैं।
  • गुलाबगढ़ से मचैल माता मंदिर तक पैदल यात्रा करनी होती है, जो लगभग 32 किमी की होती है। अधिकतर श्रद्धालु इस यात्रा को दो दिनों में पूरा करते हैं और रास्ते में कई गांवों में रात रुकते हैं।
  • छड़ी यात्रा को मचैल पहुंचने में कुल तीन दिन लगते हैं।
  • यात्रा मार्ग में कई स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए 'लंगर' की व्यवस्था होती है।
  • जम्मू और कश्मीर सरकार द्वारा तीर्थयात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
  • सर्दियों के महीनों (दिसंबर, जनवरी, फरवरी) में यह मंदिर बर्फबारी के कारण बंद रहता है।

हेलीकॉप्टर से भी जा सकते हैं

जम्मू और गुलाबगढ़ से मचैल माता के लिए हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध है। हेलिपैड मंदिर से मात्र 100 मीटर की दूरी पर स्थित है। हेलीकॉप्टर से यात्रा में केवल 7-8 मिनट लगते हैं।

मचैल माता मंदिर से जुड़ी मान्यताएं

स्थानीय लोगों के अनुसार यहां स्थित देवी अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। ऐसी मान्यताएं हैं कि कई श्रद्धालुओं को यहां माता के साक्षात दर्शन भी प्राप्त हुए हैं। कहते हैं जो भी भक्त यहां सच्ची श्रद्धा से आता है उसकी समस्त मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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