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Malamas Niyam: पूजा-पाठ के लिए अत्यंत पावन माना जाता है मलमास का महीना, इस माह में भूलकर भी न करें इन चीजों का सेवन, जानें नियम

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : May 19, 2026 11:17 pm IST,  Updated : May 19, 2026 11:17 pm IST

Malamas Niyam: मलमास में मांगलिक कार्य वर्जित होत हैं लेकिन इस माह में पूजा-पाठ करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। तो आइए जानते हैं कि इस माह में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं।

मलमास नियम- India TV Hindi
मलमास नियम Image Source : MAGNIFIC

Malamas Niyam: 17 मई से मलमास का महीना शुरू हो चुका है जो कि पूरे एक महीने तक रहेगा। हिंदू धर्म में मांगलिक कार्यों के लिए मलमास माह शुभ नहीं माना गया है। लेकिन धार्मिक कार्यों के लिए मलमास को बहुत ही पुण्यकारी माह माना जाता है। आपको बता दें कि हर तीन साल में मलमास लगता है, जिसे अधिकमास और पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना है। इस वर्ष मलमास को अधिक ज्येष्ठ मास कहा जा रहा है क्योंकि मलमास ज्येष्ठ माह में लगा है। इस साल दो ज्येष्ठ महीने होंगे। तो चलिए अब जानते हैं कि ज्येष्ठ माह में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं। 

मलमास में क्या नहीं खाना चाहिए?

धार्मिक दृष्टि से मलमास पूजा-पाठ और दान-पुण्य के लिए पुण्यकारी महीना होता है। ऐसे में मलमास में खानपान का विशेष ध्यान रखना चागिए। मलमास में तामिस चीजों से परहेज करें। इस माह में मांस, मछली, अंडा और मदिरा का सेवन न करें। इसके अलावा प्याज-लहसुन खाने की भी मनाही होती है। मलमा, में बैंगन, भिंडी खाना वर्जित माना गया है तो इसे दूरी बनाकर रखें।

मलमास में क्या खाना चाहिए?

मलमास या अधिकमास में सात्विक आहार का सेवन करें। अपने खाने में दूध, दही, मौसमी फल आदि को शामिल करें। इसके अलावा भिंडी, जौ, चना, तिल और मूंगफली खा सकते हैं। मलमास में मसालेदार खाने से भी बचें और घर का ताजा और हल्का भोजन की करें। विष्णु भक्त मलमास में एक समय ही भोजन करें। संभव हो तो व्रत रखें और फलाहार ग्रहण करें।

मलमास कब खत्म होगा?

मलमास 15 जून 2026 को समाप्त होगा। मलमास खत्म होने के बाद शुभ और मांगलिक कार्य फिर से आरंभ हो जाएंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,इस महीने में मांगलिक कार्य नहीं किए जाते लेकिन भगवान विष्णु  की आराधना, जप, तप और दान-पुण्य करने के लिए इसे सबसे उत्तम और पवित्र महीना माना जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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