Pancharatra Vrat 2026: पंचरात्र व्रत अधिकमास के आखिरी 5 दिनों में रखा जाता है। जिसकी शुरुआत परम एकादशी से होती है और समापन अमावस्या के दिन। इस साल इस पावन व्रत का प्रारंभ 11 जून से हो रहा है और समापन 15 जून को होगा। इस व्रत को बेहद चमत्कारी माना जाता है। कहते हैं जो भी व्यक्ति सच्चे मन से ये व्रत रखता है उसके जीवन से दरिद्रता दूर चली जाती है और उसे सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इतना ही नहीं ये व्रत पूरे महीने के पुरुषोत्तम व्रत का अखंड फल प्रदान करता है। चलिए जानते हैं इस व्रत को कैसे रखा जाता है और इसका महत्व क्या है।
पंचरात्र व्रत 2026 की तिथियां
- पहला दिन (अधिकमास की परम एकादशी): 11 जून 2026, गुरुवार
- दूसरा दिन (अधिकमास की द्वादशी): 12 जून 2026, शुक्रवार
- तीसरा दिन (अधिकमास की त्रयोदशी): 13 जून 2026, शनिवार
- चौथा दिन (अधिकमास की चतुर्दशी): 14 जून 2026, रविवार
- पांचवां दिन (अधिकमास अमावस्या): 15 जून 2026, सोमवार
पंचरात्र व्रत के नियम और पूजा विधि
- पंचरात्र व्रत करने वाले श्रद्धालु पांच दिनों तक रोजाना सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र नदी में स्नान करें। अगर नदी स्नान संभव न हो तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- व्रत के पहले दिन हाथ में गंगाजल लेकर 5 दिनों के व्रत का संकल्प लें।
- आप अपनी इच्छानुसार फलाहारी या दिन में एक समय (सूर्यास्त के बाद) सात्विक भोजन ग्रहण करके भी ये व्रत रह सकते हैं।
- इन 5 दिनों में रोज भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।
- पूजा में भगवान को पीले फूल, पीले फल, चंदन और तुलसी दल अवश्य अर्पित करें।
- सुबह-शाम मंदिर में घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें।
- साथ ही सुबह-शाम विष्णु भगवान और माता लक्ष्मी की आरती भी करें।
- संभव हो तो पंचरात्र व्रत के दौरान घर के मंदिर में पांच दिनों तक अखंड घी का दीपक जलाएं।
- इन पांच दिनों में सात्विक दिनचर्या का पालन करें।
- लहसुन-प्याज और किसी भी तरह के तामसिक भोजन का सेवन भूलकर भी न करें।
- व्रत के आखिरी दिन यानी 15 जून को एक कांसे के बर्तन में मालपुए रखकर किसी ब्राह्मण को दान जरूर करें। कहते हैं इस उपाय से दरिद्रता का नाश हो जाता है।
- व्रत के दौरान किसी की बुराई न करें, झूठ न बोलें, ब्रह्मचर्य का पालन करें और जितना हो सके शांत रहें।
- इन पांच दिनों में मन ही मन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करते रहें।
- शास्त्रों में इस व्रत को निर्जला रखने का भी विधान बताया गया है।
- इस 5 दिनों में जमीन पर ही सोएं।
पंचरात्र व्रत के लाभ
धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस व्रत को रखने से आर्थिक तंगी से छुटकारा मिल जाता है। साथ ही कर्ज के बोझ से भी मुक्ति मिलती है और मां लक्ष्मी जीवन को सुख-समृद्धि से भर देती हैं।
भगवान कुबेर ने भी रखा था ये व्रत
पौराणिक कथाओं अनुसार पंचरात्र व्रत को करने से ही कुबेर को धन के देवता का पद प्राप्त हुआ था। वहीं सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र को भी इस व्रत के प्रभाव से ही उनका खोया हुआ राज्य वापस मिला था।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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