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गोदान से पितरों का उद्धार! श्राद्ध में गाय का दान क्यों माना जाता है पुण्यकारी? गरुड़ पुराण में बताया है इसका महत्व

 Written By: Arti Azad
 Published : Oct 07, 2026 07:32 pm IST,  Updated : Oct 07, 2026 07:32 pm IST

गाय का दान करने को बहुत ही पुण्यकर्म बताया गया है। वहीं, पितृ पक्ष में भी गोदान से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। जानिए श्राद्ध पक्ष में गोदान का क्या महत्व है और गोदान से जुड़ी किन बातों का विशेष ध्यान रखने की परंपरा है।

pitru paksha, पितृ पक्ष में गोदान का महत्व और लाभ- India TV Hindi
पितृ पक्ष में गोदान का महत्व और लाभ Image Source : MAGNIFIC

सनातन धर्म में दान को पुण्यदायी कर्म माना गया है और पितृ पक्ष में इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दौरान गोदान करने से पितरों की शांति और मोक्ष की कामना की जाती है। गरुड़ पुराण में भी गोदान से जुड़ी विभिन्न मान्यताओं और इसके महत्व का वर्णन मिलता है।

दान का विशेष महत्व

सनातन परंपरा में दान को महत्वपूर्ण धार्मिक कर्म माना गया है। पितृ पक्ष में पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और दान करने की परंपरा है। इनमें गोदान को भी विशेष महत्व दिया गया है। धार्मिक मान्यता है कि गाय में अनेक देवी-देवताओं का वास होता है, इसलिए गाय का दान पुण्यकारी माना जाता है।

सवत्सा गोदान श्रेष्ठ

गरुड़ पुराण से जुड़ी मान्यताओं में अलग-अलग प्रकार के गोदान का उल्लेख मिलता है। दूध देने वाली गाय का दान श्रेष्ठ माना गया है। बछड़े के साथ गाय का दान सवत्सा गोदान कहलाता है और इसे विशेष पुण्यकारी माना जाता है। इसी तरह कपिला यानी लाल या भूरे रंग की गाय का दान भी फलदायी माना गया है।

गोदान की विधि

धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसी गाय का दान करना चाहिए जो वृद्ध न हो और जिसके सींग व खुर स्वस्थ और चमकदार हों। गाय के साथ यथाशक्ति धन या सोना दान करने की भी परंपरा है। गाय के साथ घी, दूध और तिल को पात्र में रखकर कुश सहित गाय की पूंछ के पास अर्पित करने की भी परंपरा बताई जाती है।

पितरों से संबंध

गोदान को पितरों की शांति और मोक्ष की कामना से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि संकट या जीवन के अंतिम समय में किया गया गोदान परलोक की यात्रा को सुगम बनाने वाला होता है। माना जाता है कि पंचधेनु के दान से कष्टों और पापों से मुक्ति मिलती है।

गोदान करने का लाभ

वैतरणी नदी और पितरों के तर्पण का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि विधिपूर्वक तर्पण और गोदान करने से 21 कुलों का उद्धार होता है। पिंडदान के दौरान हाथ में चांदी, सोना, तांबा, तिल या कुश रखने की भी परंपरा है।

कहां करें गोदान

धार्मिक परंपरा के अनुसार गोदान किसी योग्य ब्राह्मण या गौशाला को किया जा सकता है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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