Rin Mukti Ganesh Stotram In Hindi: सनातन धर्म में चतुर्थी तिथि को बेहद पावन और विशेष माना गया है। हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है, जो विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य भगवान गणेश को समर्पित होता है। फाल्गुन माह में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन श्रद्धा और विधि--विधान से गणेश जी की पूजा अर्चना और व्रत करने का विशेष महत्व बताया गया है।
संकष्टी चतुर्थी के दिन ऋणमुक्ति गणेश स्तोत्र का पाठ विशेष रूप से फलदायी माना गया है। मान्यता है कि ऋणमुक्ति गणेश स्तोत्र का पाठ करने से कर्ज से मुक्ति मिलती है, आर्थिक लाभ के योग बनते हैं और घर में धन समृद्धि बढ़ती है। यहां पढ़िए ऋणमुक्ति गणेश स्तोत्र के संपूर्ण हिंदी लिरिक्स।
॥ ऋणमुक्ति श्री गणेश स्तोत्र ॥
ॐ स्मरामि देवदेवेशंवक्रतुण्डं महाबलम्।
षडक्षरं कृपासिन्धुंनमामि ऋणमुक्तये॥
महागणपतिं वन्देमहासेतुं महाबलम्।
एकमेवाद्वितीयं तुनमामि ऋणमुक्तये॥
एकाक्षरं त्वेकदन्तमेकंब्रह्म सनातनम्।
महाविघ्नहरं देवंनमामि ऋणमुक्तये॥
शुक्लाम्बरं शुक्लवर्णंशुक्लगन्धानुलेपनम्।
सर्वशुक्लमयं देवंनमामि ऋणमुक्तये॥
रक्ताम्बरं रक्तवर्णंरक्तगन्धानुलेपनम्।
रक्तपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥
कृष्णाम्बरं कृष्णवर्णंकृष्णगन्धानुलेपनम्।
कृष्णयज्ञोपवीतं चनमामि ऋणमुक्तये॥
पीताम्बरं पीतवर्णपीतगन्धानुलेपनम्।
पीतपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥
सर्वात्मकं सर्ववर्णंसर्वगन्धानुलेपनम्।
सर्वपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥
एतद् ऋणहरं स्तोत्रंत्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः।
षण्मासाभ्यन्तरे तस्यऋणच्छेदो न संशयः॥
सहस्रदशकं कृत्वाऋणमुक्तो धनी भवेत्॥