Santan Prapti Yog: संतान सुख हर विवाहित दंपति का सपना होता है। ऐसे में शादी के बाद अक्सर दंपति के साथ ही घर के हर व्यक्ति का प्रश्न होता है कि बच्चा कब होगा। ज्योतिष शास्त्र की नजर से देखें तो कुंडली में जब कुछ विशेष योग बनते हैं तभी संतान प्राप्ति होती है। आज हम आपको इन्हीं योगों के बारे में जानकारी देंगे। इन ज्योतिषीय योगों के बारे में जानकर आप भी अपनी कुंडली को देखकर पता कर सकते हैं कि आपकी संतान कब होगी।
पहला योग
कुंडली के पंचम भाव को संतान प्राप्ति का कारक माना जाता है। इसलिए जब भी इस भाव के स्वामी की दशा चलती है तो संतान की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही पंचम भाव पर जिस ग्रह की दृष्टि होती है उसकी दशा के दौरान भी संतान प्राप्ति के योग बनते हैं। वहीं पंचम भाव में अगर कोई ग्रह स्थित हो तो उसकी दशा के दौरान भी संतान सुख मिल सकता है।
दूसरा योग
पंचम भाव का कारक ग्रह गुरु होता है। ऐसे में गुरु की महादशा या अंतर्दशा के दौरान भी संतान की प्राप्ति होने की प्रबल संभावना रहती है। इसके साथ ही गुरु ग्रह जहां हो उससे पंचम भाव में जो ग्रह हो उसकी महादशा-अतर्दशा के दौरान भी संतान प्राप्त हो सकती है।
तीसरा योग
अगर चंद्रमा से पंचम भाव में स्थित ग्रह की दशा चल रही हो तब भी संतान प्राप्ति के योग बनते हैं। यानि गुरु से पंचम भाव के ग्रह की दशा में भी और चंद्रमा से पंचम भाव के ग्रह की दशा में भी संतान की प्राप्ति हो सकती है।
चौथा योग
सूर्य को कालपुरुष कुंडली में पंचम भाव का स्वामी कहा जाता है। ऐसे में सूर्य की महादशा के दौरान भी संतान प्राप्ति के प्रबल योग बनते हैं।
पांचवां योग
नवमांश कुंडली के पंचम भाव में अगर कोई ग्रह विद्यमान है तो उसकी महादशा के दौरान भी संतान प्राप्ति के योग बनते हैं। अगर नवमांश के पंचम में कोई ग्रह न हो तो पंचम भाव की राशि के स्वामी की दशा में भी संतान प्राप्त हो सकती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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