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Shukra Pradosh Vrat Katha PDF: शुक्र प्रदोष व्रत के दिन जरूर पढ़ें ये पावन कथा, शिव-पार्वती की खूब बरसेगी कृपा

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Published : Sep 19, 2025 07:03 am IST,  Updated : Jan 30, 2026 07:17 am IST

Shukrawar Pradosh Vrat Katha PDF Download: आज शुक्र प्रदोष व्रत है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार शुक्रवार प्रदोष व्रत करने से सौन्दर्य, वैवाहिक सुख और धन-धान्य की प्राप्ति होती है। यहां हम आपको बताएंगे शुक्र प्रदोष व्रत की पावन कथा।

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शुक्र प्रदोष व्रत कथा Image Source : CANVA

Shukrawar Pradosh Vrat Katha PDF: प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को पड़ता है। ऐसी मान्यता है इस व्रत को रखने से भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होती है जिससे जीवन के सभी दुख दूर हो जाते हैं। दिन के अनुसार प्रदोष व्रत का महत्व अलग-अलग होता है। आज शुक्रवार है। कहते हैं शुक्रवार का प्रदोष व्रत रखने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। साथ ही शुक्र ग्रह से जुड़े दोष दूर हो जाते हैं। इस दिन शाम के समय शुभ मुहूर्त में भगवान शिव की विधि विधान पूजा की जाती है और साथ ही प्रदोष व्रत की कथा भी जरूर सुनी जाती है। यहां हम आपको बताएंगे शुक्र प्रदोष व्रत की कथा के बारे में।

शुक्रवार प्रदोष व्रत कथा (Shukrawar Pradosh Vrat Katha)

शुक्र प्रदोष व्रत की कथा अनुसार प्राचीन काल में एक नगर में तीन मित्र रहते थे - एक राजकुमार था, दूसरा ब्राह्मण कुमार था तो तीसरा धनिक पुत्र था। तीनों ही मित्रों का विवाह हो चुका था लेकिन धनिक पुत्र का गौना अभी बाकी था। जिस कारण से उसकी पत्नी अभी मायके में ही रह रही थी। एक दिन तीनों दोस्त बैठकर स्त्री पर चर्चा कर रहे थे।

ब्राह्मण कुमार ने स्त्रियों की तारीफ करते हुए कहा कि नारीहिन घर भूतों का डेरा होता है। जब धनिक पुत्र ने ये बात सुनी तो उसने निश्चय किया कि वह अपनी पत्नी को उसके मायके से तुरंत अपने घर ले आएगा। लड़के के माता-पिता ने उसे समझाया कि अभी शुक्र डूबे हुए हैं ऐसे में बहू-बेटियों को विदा कराकर लाना अशुभ माना जाता है। लेकिन धनिक पुत्र ने अपने मां-बाप की एक नहीं सुनी और वो अपनी पत्नी के घर पहुंच गया।

लड़के के ससुराल वालों ने भी उसे बहुत समझाया कि अभी अपनी पत्नी को न लेकर जाएं लेकिन उसने अपने सास-ससुर की भी नहीं सुनी और वो जबरदस्ती विदाई करा लाया। दोनों पति-पत्नी बेलगाड़ी पर बैठकर निकल गए। रास्ते में उनकी बैलगाड़ी का पहिया निकल गया और एक बैल की टांग भी टूट गई। जिससे दोनों गिर गए और उन्हें बहुत चोट आई। कुछ दूरी पर उन्हें डाकुओं ने भी घेर लिया और उनका सारा धन छीन लिया। दोनों दुखी मन ये घर पहुंचे।

घर पहुंचते ही धनिक पुत्र को सांप ने काट लिया। वैद्य को बुलवाया गया तो उसने बताया कि अब इसके पास सिर्फ तीन दिन बचे हैं। जब ब्राह्मण कुमार को ये समाचार मिला तो उसने धनिक पुत्र के माता-पिता को शुक्र प्रदोष व्रत रखने की सलाह दी। कहा कि इसे पत्नी सहित इसके ससुराल भेज दो। ये सारी दिक्कतें शुक्र अस्त के दौरान पत्नी को विदा कराकर लाने के कारण हुई है। यदि ये ससुराल पहुंच जाएगा और आप प्रदोष व्रत रखेंगे तो ये निश्चित ही ठीक हो जाएगा।

इसके बाद लड़के को उसके ससुराल भेज दिया गया जहां जाकर उसकी हालत ठीक हो गई। शुक्र प्रदोष व्रत के कारण धनिक पुत्र के सारे कष्ट दूर हो गए। 

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Shukrawar Pradosh Vrat Katha PDF Download

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