सनातन परंपराओं में कछुए का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने कच्छप अवतार लेकर समुद्र मंथन के दौरान मंदराचल पर्वत को आधार दिया था। इसी वजह से कछुए को स्थिरता और धैर्य का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कछुए वाली अंगूठी भी जीवन में स्थिरता, धन, सुख और समृद्धि से जुड़ी मानी जाती है। लेकिन इस अंगूठी को धारण करने के कुछ खास नियम बताए गए हैं। ऐसा माना जाता है कि सही तरीके से पहनी गई अंगूठी ही शुभ फल दे सकती है।
किसे पहननी चाहिए
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, जिन लोगों के जीवन में लगातार उतार चढ़ाव बना रहता है, आर्थिक स्थिति कमजोर है या मन को एकाग्र करने में परेशानी होती है, वे कछुए वाली अंगूठी धारण कर सकते हैं। इसे जीवन में स्थिरता लाने वाला माना जाता है।
शुभ धातु और अंगुली
आमतौर पर कछुए वाली अंगूठी चांदी की बनाई जाती है। चांदी का संबंध अंगूठी चंद्रमा और शुक्र से होता है और इनके शुभ प्रभाव को बढ़ाने में सहायक मानी जाती है। कुंडली के अनुसार पंचधातु या अष्टधातु की अंगूठी भी बनवाई जा सकती है। इस अंगूठी को दाहिने हाथ की तर्जनी या मध्यमा अंगुली में पहनें। तर्जनी का संबंध देव गुरु बृहस्पति से और मध्यमा का संबंध शनि ग्रह से होता है। बृहस्पति को ज्ञान और शनि को कर्म का कारक माना गया है।
मुख आपकी ओर रहे
इस अंगूठी को पहनते समय सबसे जरूरी बात कछुए के मुख की दिशा मानी जाती है। कछुए का मुख पहनने वाले व्यक्ति की ओर होना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इससे धन और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। अंगूठी को अंगूली में बार-बार घुमाने से बचना चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कि कछुए का मुख विपरीत दिशा में न हो।
शुक्रवार का दिन शुभ
नई अंगूठी का शुद्धिकरण करना चाहिए। इसके लिए अंगूठी को गंगाजल से साफ करके मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु के श्री चरणों में रखें। इसके बाद धूप दीप से पूजा करें और ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः तथा ॐ विष्णवे नमः मंत्र का जाप करके अंगूठी धारण करें। इस अंगूठी को शुक्रवार और सोमवार के दिन पहनना शुभ माना जाता है। अगर शुक्रवार के दिन पूर्णिमा तिथि पड़ रही हो तो उसे और भी शुभ माना गया है।
अंगूठी उतारने का भी है नियम
कछुए वाली अंगूठी पहनने के बाद उसकी नियमित साफ सफाई करते रहें। यह अंगूठी पहनने वाले व्यक्ति को मांस, मदिरा का सेवन से बचने की सलाह दी जाती है। अगर किसी वजह से कछुए वाली अंगूठी उतारनी पड़े तो उसे मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु के श्री चरणों में रखना चाहिए। इसे धारण करने से पहले अपनी कुंडली किसी योग्य ज्योतिष को दिखाने की सलाह दी जाती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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