Vishwakarma Puja 2026 Muhurat, Mantra, Aarti And Bhajan Live: आज विश्वकर्मा जयंती मनाई जा रही है, जिसे विश्वकर्मा पूजा के नाम से जाना जाता है। यह पर्व सूर्य के कन्या राशि में गोचर करने के समय मनाया जाता है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा होती है, जिन्हें सृष्टि का पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है। इस दिन उद्योगों और फैक्ट्रियों में भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित करके उनकी विधि विधान पूजा की जाती है। साथ ही लोग इस त्योहार पर अपने कार्यालय की मशीनों और उपकरणों की भी पूजा करते हैं। कहते हैं इस पूजा से कार्यस्थल में सफलता, सुरक्षा और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। चलिए अब जानते हैं भगवान विश्वकर्मा की पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र, कथा, आरती, भजन समेत सारी जानकारी।
विश्वकर्मा पूजा मुहूर्त 2026 (Vishwakarma Puja Muhurat 2026)
- सुबह की पूजा का शुभ मुहूर्त- 07:58 AM से 10:43 AM बजे तक
- दोपहर की पूजा का शुभ मुहूर्त - 12:15 PM से 01:48 PM बजे तक
- शाम की पूजा का शुभ मुहूर्त - 04:52 PM से 06:24 PM बजे तक
विश्वकर्मा पूजा विधि (Vishwakarma Puja Vidhi)
- विश्वकर्मा पूजा के दिन सबसे पहले अपने सभी औजारों, मशीनों और कार्यस्थल की अच्छी से सफाई कर लें।
- फिर पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़ककर स्थान को पवित्र बनाएं।
- इसके बाद चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और वहां लाल रंग के कुमकुम से स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं।
- पूजा की शुरुआत गणेश जी की पूजा से करें।
- फिर भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति स्थापित करें। उन्हें हल्दी, रोली, अक्षत, फूल, मिठाई और फल अर्पित करें।
- फिर अपने सभी औजारों और मशीनों पर तिलक लगाएं। साथ ही फूल और अक्षत भी चढ़ाएं।
- साथ ही 'ॐ विश्वकर्मणे नमः' मंत्र का जाप करें।
- फिर पूजा के अंत में भगवान विश्वकर्मा की आरती करें।
- आरती के बाद सभी में प्रसाद बांट दें।
- फिर किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
विश्वकर्मा भगवान की आरती लिरिक्स (Vishwakarma Ji Ki Aarti)
- जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
- जय श्री विश्वकर्मा ।
- सकल सृष्टि के करता,
- रक्षक स्तुति धर्मा ॥
- जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
- जय श्री विश्वकर्मा ।
- आदि सृष्टि मे विधि को,
- श्रुति उपदेश दिया ।
- जीव मात्र का जग में,
- ज्ञान विकास किया ॥
- जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
- जय श्री विश्वकर्मा ।
- ऋषि अंगीरा तप से,
- शांति नहीं पाई ।
- ध्यान किया जब प्रभु का,
- सकल सिद्धि आई ॥
- जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
- जय श्री विश्वकर्मा ।
- रोग ग्रस्त राजा ने,
- जब आश्रय लीना ।
- संकट मोचन बनकर,
- दूर दुःखा कीना ॥
- जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
- जय श्री विश्वकर्मा ।
- जब रथकार दंपति,
- तुम्हारी टेर करी ।
- सुनकर दीन प्रार्थना,
- विपत सगरी हरी ॥
- जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
- जय श्री विश्वकर्मा ।
- एकानन चतुरानन,
- पंचानन राजे।
- त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज,
- सकल रूप साजे ॥
- जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
- जय श्री विश्वकर्मा ।
- ध्यान धरे तब पद का,
- सकल सिद्धि आवे ।
- मन द्विविधा मिट जावे,
- अटल शक्ति पावे ॥
- जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
- जय श्री विश्वकर्मा ।
- श्री विश्वकर्मा की आरती,
- जो कोई गावे ।
- भजत गजानांद स्वामी,
- सुख संपति पावे ॥
- जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
- जय श्री विश्वकर्मा ।
- सकल सृष्टि के करता,
- रक्षक स्तुति धर्मा ॥
(विश्वकर्मा पूजा मंत्र, भजन, भोग, सामग्री लिस्ट और अन्य सभी जरूरी जानकारी के लिए बने रहिए हमारे इस लाइव ब्लॉग पर)