हिंदू धर्म में पितरों को प्रसन्न करने के लिए और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण आदि किए जाते हैं। खासकर पितृपक्ष और अमावस्या तिथि को पितरों के निमित्त तर्पण,दान, श्राद्ध, पिंडदान करना बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितरों का पिंडदान और श्राद्ध करने से उनकी आत्मा जन्म-मरण के चक्र से भी मुक्त हो सकती है और पितृदोष से भी व्यक्ति को मुक्ति मिलती है। हालांकि पितरों का श्राद्ध और पूजन करने के बाद कुछ कार्य हैं जिनको करने से व्यक्ति को बचना चाहिए नहीं तो श्राद्ध-तर्पण का शुभ फल नष्ट हो सकता है। आइए विस्तार से जान लेते हैं इन कार्यों के बारे में।
तुरंत भोजन न करें
पितरों का तर्पण और श्राद्ध कर्म करने के बाद व्यक्ति को तुरंत कभी भी भोजन नहीं करना चाहिए। पितरों की पूजा संपन्न करने के बाद व्यक्ति को ब्राह्मण, कुत्ता, गाय, कौआ, चींटी आदि को अन्न खिलाना चाहिए। पितरों की पूजा पूरी तरह से संपन्न होने के बाद कम से कम 1 घंटे के बाद व्यक्ति को भोजन ग्रहण करना चाहिए।
पूजन के तुरंत बाद न करें विश्राम
कई लोगों की आदत होती है कि वो पूजा संपन्न होने के तुरंत बाद आराम करते हैं। हालांकि, धार्मिक मतानुसार ऐसा करना गलत है खासकर पितृ पूजन के बाद। पितरों की पूजा के बाद आपको दान-पुण्य करना चाहिए न कि आराम। दान-पुण्य के साथ ही पितरों को स्मरण या पितृ मंत्रों का जप भी आप कर सकते हैं। पितरों की पूजा के एक पहर (3 घंटे) बाद ही व्यक्ति को आराम करना चाहिए। हालांकि, यह नियम वृद्ध और बीमार लोगों के लिए लागू नहीं होता।
गलती से भी न करें तामसिक चीजों का सेवन
पितरों की पूजा के बाद आपको गलती से भी तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। खासकर जिस दिन घर में पितरों की पूजा हुई हो उस दिन तो यह गलती आपको भूलकर भी नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से आपकी पूजा का शुभ फल पूरी तरह से नष्ट हो सकता है।
घर में न करें कलह
पितरों की पूजा के बाद आपको घर में लड़ाई-झगड़ा या बहसबाजी करने से भी बचना चाहिए और इस दिन गलती से भी घर के बुजुर्गों का दिल नहीं दुखाना चाहिए। ऐसा करने से भी पितरों की आत्मा को ठेस पहुंच सकती है और तर्पण, श्राद्ध करने के बाद भी उनकी आत्मा अतृप्त रह सकती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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