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माला जप करते समय भूलकर भी न लगाएं इस उंगली का साथ, हिंदू धर्म में बताए हैं इसके कुछ जरूरी नियम

 Written By: Arti Azad
 Published : Sep 27, 2026 08:34 am IST,  Updated : Sep 27, 2026 08:34 am IST

सनातन धर्म में माला जाप करने के भी कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। इस दौरान एक उंगली का इस्तेमाल करना वर्जित बताया है। माला को अंगूठे और मध्यमा की मदद से फेरने की परंपरा है। जानिए किस दिशा में बैठकर माला जाप करना चाहिए और किन बातों का ध्यान रखना।

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माला जप के नियम Image Source : PINTEREST

माला जप को सनातन परंपरा में मन को एकाग्र करने और आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। इसमें केवल मंत्र का जाप ही नहीं, बल्कि माला पकड़ने और मनके फेरने के भी कुछ नियम बताए गए हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जप करते समय एक खास उंगली को माला से दूर रखना चाहिए। आइए जानते हैं माला जप करते समय किस उंगली का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके अलावा जप के दौरान और माला धारण करने से पहले किन नियमों का ध्यान रखना चाहिए।

तर्जनी के इस्तेमाल से क्यों बचें?

माला जप के दौरान तर्जनी यानी इंडेक्स फिंगर (Index Finger) को इस्तेमाल न करने की मान्यता है। यह उंगली अहंकार और अधिकार भाव का प्रतीक मानी जाती है, जबकि जप का उद्देश्य मन को शांत और एकाग्र करना है। इस उंगली का संबंध इशारा करने, निर्देश देने और अधिकार जताने से माना गया है। आध्यात्मिक साधना में अहंकार बाधा है, इसलिए जप करते समय तर्जनी को माला से अलग रखने की परंपरा है।

माला जप करने के जरूरी नियम

  1. तर्जनी उंगली का प्रयोग वर्जित: माला को अनामिका उंगली पर टिकाया जाता है। इसके बाद अंगूठे और मध्यमा की सहायता से एक-एक मनके को आगे बढ़ाते हैं। तर्जनी उंगली इस पूरी प्रक्रिया में अलग रहती है।
  2. माला जमीन को न छुए: ऐसी मान्यता है कि जप के दौरान माला को जमीन से स्पर्श नहीं होने देना चाहिए।
  3. न लांघें सुमेरु: माला में सामान्यतः 108 मनके होते हैं और इनके साथ एक अलग बड़ा मनका होता है, जिसे सुमेरु कहा जाता है। जप करते समय सुमेरु को पार करना उचित नहीं माना जाता। सुमेरु तक पहुंचने के बाद माला को पलटकर उसी दिशा में आगे जप करने की परंपरा है।
  4. गोमुखी का महत्व: माला को गोमुखी नाम की विशेष कपड़े की थैली में रखकर जप किया जाता है। इससे माला ढकी रहती है और साधक का ध्यान भी भटकने से बचता है। हालांकि, यह अनिवार्य नहीं है।
  5. स्वच्छता जरूरी: जप से पहले हाथ-पैर धोकर स्वच्छ होकर बैठने और पवित्र आसन का इस्तेमाल करने की परंपरा है। माला को नाभि से ऊपर और हृदय के आसपास रखा जाता है।
  6. दिशा और समय: मंत्र जाप के लिए ब्रह्म मुहूर्त विशेष बताया है। सूर्योदय से पहले का शांत वातावरण साधना के लिए उपयुक्त माना है। जप करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए। हालांकि, मंत्र और साधना की अलग-अलग परंपराओं में नियम अलग हो सकते हैं। ऐसे में गुरु या परंपरा से मिले निर्देशों को प्राथमिकता दें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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