हस्तरेखा शास्त्र में भी ज्योतिष की तरह कुछ योग बताए गए हैं जिन्हें बेहद शुभ माना जाता है। इन्हीं योगों में से एक शिवयोग भी है। इस योग को भोलेनाथ की कृपा का प्रतीक माना जाता है और हथेली में कुछ विशेष चिह्नों को इस योग का नाम दिया गया है। आज इसी बारे में हम आपको जानकारी देंगे और बताएंगे कि शिवयोग हथेली में होने से कैसे परिणाम जीवन में मिल सकते हैं।
कौन से चिह्न माने जाते हैं शिवयोग का प्रतीक?
हथेली पर त्रिशूल का चिह्न, अर्धचंद्र और शिवलिंग जैसी आकृति शिवयोग का प्रतीक मानी जाती है।
त्रिशूल का चिह्न- त्रिशूल के चिह्न को शिवयोग का प्रतीक माना जाता है। त्रिशूल अगर तर्जनी उंगली के नीचे बना हो तो इसे सबसे शुभ माना जाता है। त्रिशूल का निशान हृदय रेखा, भाग्य रेखा और शनि पर्वत पर बनना भी शुभ संकेत माना गया है। इस योग के बनने से व्यक्ति को जीवन में धन लाभ, समाज में सम्मान और पारिवारिक जीवन में खुशियां आपको मिल सकती हैं।
हथेली पर अर्धचंद्र- अगर दोनों हथेलियों को जोड़ने पर हृदय रेखाओं के जरिए अर्धचंद्र बनता है तो इसे भी शिवयोग माना जाता है। अर्धचंद्र जिन भी लोगों की हथेली में बनता है उन्हें भगवान शिव के साथ चंद्र ग्रह की भी कृपा प्राप्त हो सकती है। ऐसे लोगों को वैवाहिक और पारिवारिक जीवन में सुखद फल प्राप्त हो सकते हैं। आध्यात्मिक रूप से भी ऐसे लोग बेहद सक्रिय माने जाते हैं। इनको शिवजी की कृपा से समाज में मान प्रतिष्ठा भी प्राप्त हो सकती है।
हथेली पर शिवलिंग का चिह्न- शिवलिंग का चिह्न भी शिवयोग का प्रतीक कहा जाता है। जिन भी लोगों की हथेली में शिवलिंग का निशान बनता है वो बेहद धार्मिक प्रकृति के हो सकते हैं। ऐसे लोग सबको सम्मान देने वाले और परोपकारी माने जाते हैं। भगवान शिव की इनपर कृपा होती है जिसके चलते जीवन में ये ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं। कला और रचनात्मकता के क्षेत्रों में भी ऐसे लोग अच्छा प्रदर्शन करते देखे जा सकते हैं। वैराग्य की भावना भी इनके अंदर देखने को मिल सकती है। त्रिशूल, अर्धचंद्र और शिवलिंग के निशान के अलावा हथेली की उंगलियों पर मौजूद 4 चिह्न भी बेहद शुभ माने जाते हैं, इनके बारे में आप हमारी वेबसाइट पर विस्तार से पढ़ सकते हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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