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विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का व्रत कब है 29 या 30 सितंबर? यहां जानें सटीक डेट, मुहूर्त और चंद्रोदय का समय

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Sep 26, 2026 02:58 pm IST,  Updated : Sep 26, 2026 02:58 pm IST

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। तो यहां जानिए विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी की तारीख और पूजा मुहूर्त।

विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी 2026- India TV Hindi
विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी 2026 Image Source : PEXELS

हर माह की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित है। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन गणपति जी पूजा की जाती है। संकष्टी चतुर्थी की पूजा और व्रत रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद पूरा होता है। वहीं शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि चतुर्थी की पूजा और व्रत करने से बप्पा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है। बता दें कि भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को विघ्नराज संकष्टी के रूप में मनाई जाती है। तो आइए जानते हैं कि विघ्नराज संकष्टी कब है और पूजा का मुहूर्त क्या रहेगा।

विघ्नराज संकष्टी 2026 डेट 

पंचांग के अनुसार,भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 29 सितंबर को शाम 5 बजकर 9 मिनट पर होगा।  चतुर्थी तिथि का समापन दोपहर 2 बजकर 55 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का व्रत 29 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। 

विघ्नराज संकष्टी 2026 शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:53 ए एम से 05:41 ए एम
  • प्रातः संध्या- 05:17 ए एम से 06:29 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 12:05 पी एम से 12:53 पी एम
  • विजय मुहूर्त- 02:29 पी एम से 03:17 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 06:29 पी एम से 06:53 पी एम
  • सायाह्न संध्या- 06:29 पी एम से 07:41 पी एम
  • सर्वार्थ सिद्धि योग- 06:29 ए एम से 09:03 ए एम
  • अमृत सिद्धि योग- 06:29 ए एम से 09:03 ए एम

विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी 2026 चंद्रोदय का समय

विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रोदय रात 8 बजकर 20 मिनट पर होगा। चंद्रदोय के बाद लोटे में जल, दूध, चंदन और अक्षत मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद ही विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी व्रत का पारण करें।

विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व

भगवान विघ्नराज, भगवान गणेश के अष्टविनायक रूपों में सातवें स्वरूप हैं। गणेश जी के इस रूप का पूजन करने से समस्त प्रकार के विघ्नों का निवारण होता है और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। मुद्गल पुराण में भगवान विघ्नराज के प्रादुर्भाव से सम्बन्धित वर्णन के अनुसार, ममतासुर नामक दैत्य के संहार हेतु गणेश जी स्वयं भगवान विघ्नराज के रूप में प्रकट हुए थे। द्वापरयुग में भगवान कृष्ण ने अपने अपहृत पौत्र अनिरुद्ध की प्राप्ति हेतु लोमश ऋषि के सुझाव पर यह उत्तम व्रत किया था। व्रत के फलस्वरूप बाणासुर का संहार कर उन्होंने अनिरुद्ध को मुक्त कराया था।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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