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पैरों की दूसरी उंगली में ही क्यों पहनते हैं बिछिया? चांदी के इस गहने का राहु-केतु से है खास कनेक्शन

 Written By: Arti Azad
 Published : Sep 21, 2026 02:31 pm IST,  Updated : Sep 21, 2026 02:31 pm IST

विवाह के बाद पैरों में पहनी जाने वाली बिछिया सुहाग का प्रतीक है। ज्योतिषीय मान्यताओं में इसके लिए चांदी की धातु चुनने और इसे पैरों की खास उंगली में पहनने के पीछे ग्रहों से जुड़े कारण बताए गए हैं। चलिए जानते हैं चांदी की बिछिया और राहु-केतु का संबंध।

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चांदी की बिछिया Image Source : PINTEREST

बिछिया भारतीय महिलाओं के पारंपरिक आभूषणों में खास जगह रखती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बिछिया चांदी की ही क्यों होती है और इसे पैरों की दूसरी उंगली में ही क्यों पहनाया जाता है? इसके पीछे केवल परंपरा नहीं, बल्कि ज्योतिषीय मान्यताएं भी हैं। तो चलिए जानते हैं कि आखिर बिछिया को पैरों की दूसरी उंगली में ही क्यों पहनते हैं और चांदी के इस गहने का राहु-केतु से क्या खास कनेक्शन बताया गया है। 

चांदी से ग्रहों का संबंध

ज्योतिषीय मान्यता में चांदी को चंद्रमा और शुक्र से संबंधित धातु माना गया है। चंद्रमा को मन और मानसिक शांति का कारक माना जाता है, जबकि शुक्र का संबंध वैवाहिक सुख और सौंदर्य से जोड़ा जाता है। इसी आधार पर पैरों में चांदी पहनने को सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने और मानसिक तनाव कम करने में सहायक माना जाता है। वहीं, चांदी की अंगूठी कुछ राशियों के लिए वरदान है

राहु-केतु से क्या कनेक्शन

पारंपरिक ज्योतिष में शरीर के अलग-अलग हिस्सों का संबंध ग्रहों से बताया गया है। पैरों और शरीर के निचले हिस्से पर केतु का प्रभाव माना जाता है, जबकि राहु को भ्रम और अचानक आने वाली बाधाओं से जोड़ा जाता है। ज्योतिषीय मत के अनुसार चांदी की शीतल प्रकृति इन ग्रहों से जुड़े नकारात्मक प्रभावों को शांत करने में सहायक मानी जाती है।

दूसरी उंगली में ही क्यों पहनते हैं बिछिया? 

बिछिया आमतौर पर पैर के अंगूठे के ठीक पास वाली दूसरी उंगली में पहनी जाती है। पारंपरिक मान्यताओं और एक्यूप्रेशर से जुड़े विचारों में इस उंगली की नसों का संबंध शरीर के कुछ महत्वपूर्ण अंगों से बताया जाता है। चांदी के हल्के दबाव को भी कुछ परंपराओं में शरीर के संतुलन के लिए उपयोगी माना गया है। 

सोने की बिछिया क्यों नहीं

धार्मिक परंपराओं में पैरों में सोना पहनने से परहेज किया जाता है। मान्यता है कि सोना भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी से जुड़ा है और इसे कमर से नीचे धारण करना उचित नहीं माना जाता। इसलिए बिछिया के लिए चांदी को ही परंपरागत रूप से चुना गया।

टूटे तो तुरंत बदलें

ज्योतिषीय परंपरा में बिछिया के टूटने या खोने को शुभ नहीं माना जाता। ऐसी स्थिति में पुरानी बिछिया को बदलकर नई चांदी की बिछिया पहनने की सलाह दी जाती है। परंपरा के अनुसार दोनों पैरों में बिछिया संतुलित तरीके से पहनना उचित माना जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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