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खड़े होकर क्यों नहीं पीना चाहिए पानी? जानिए जल को लेकर क्या कहती हैं धार्मिक मान्यताएं

 Written By: Arti Azad
 Published : Sep 05, 2026 12:30 pm IST,  Updated : Sep 05, 2026 12:30 pm IST

सनातन परंपरा में जल को सम्मान और पवित्रता से जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से पानी पीते समय भी कुछ मर्यादाओं का पालन करने की बात कही गई है। जानिए खड़े होकर पानी पीने को लेकर धार्मिक मान्यता क्या है और बैठकर पानी पीने की परंपरा क्यों चली आ रही है।

water drinking etiquette- India TV Hindi
क्यों चली आ रही है बैठकर पानी पीने की परंपरा Image Source : PINTEREST

पानी जीवन का आधार है और भारतीय परंपरा में इसे केवल प्यास बुझाने का साधन नहीं, बल्कि पवित्र तत्व भी माना गया है। यही वजह है कि पुराने समय से जल ग्रहण करने को लेकर भी कुछ नियम और परंपराएं बताई जाती रही हैं। घर के बड़े-बुजुर्ग अक्सर खड़े होकर पानी पीने के बजाय बैठकर पानी पीने की सलाह देते हैं। आखिर इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यता है और पानी पीने का सही तरीका क्या माना गया है? आइए जानते हैं।

जल का महत्व

सनातन धर्म में जल को जीवनदायी और पवित्र तत्व माना गया है। शास्त्रों में दैनिक जीवन से जुड़े कई नियम बताए गए हैं, जिनका उद्देश्य जीवन में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखना है। पानी पीने से जुड़ी परंपराएं भी इसी सोच का हिस्सा मानी जाती हैं। 

शांति से पीएं पानी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जल ग्रहण करते समय जल्दबाजी के बजाय शांत भाव रखना चाहिए। पानी को सम्मान के साथ बैठकर पीने की परंपरा रही है। खड़े होकर पानी पीना कुछ परंपराओं में जल और अन्न के प्रति अनादर या अशिष्टता से जोड़कर देखा गया है। माना जाता है कि शांत होकर जल ग्रहण करने से मन में भी स्थिरता बनी रहती है।

जल तत्व का संतुलन

ज्योतिष और पारंपरिक मान्यताओं में जल को शरीर और प्रकृति के महत्वपूर्ण तत्वों में शामिल किया गया है। मान्यता है कि बैठकर और संयम के साथ पानी पीने से शरीर में जल तत्व का संतुलन बना रहता है। इसके विपरीत खड़े होकर पानी पीने को शरीर और स्वभाव में चंचलता आती है।

आयुर्वेद का नजरिया

पानी पीने के तरीके को लेकर आयुर्वेदिक परंपरा में भी संयम और सहजता पर जोर दिया गया है। हालांकि, खड़े होकर पानी पीने से सीधे किडनी, जोड़ों या आंतों को नुकसान पहुंचने जैसे दावों को आधुनिक वैज्ञानिक प्रमाणों से स्थापित नहीं माना जा सकता। इसलिए इन्हें पारंपरिक मान्यता के तौर पर ही समझना उचित है।

सही तरीका

पानी पीते समय आराम से बैठना और धीरे-धीरे घूंट लेकर पानी पीना एक अच्छी आदत मानी जाती है। धार्मिक दृष्टि से भी जल को सम्मान देते हुए शांत मन से ग्रहण करने की परंपरा बताई गई है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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